नई दिल्ली (जेएनएन)। दिल्ली सरकार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक कर राजधानी में 1000 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने के लिए सलाहकार की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। ट्वीट में उन्होंने कहा है कि यह निर्णय प्रदूषण कम करने और दिल्ली में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक करने के लिए एक बड़ा कदम है।

सीसीटीवी कैमरों पर नहीं हुआ निर्णय
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में सीसीटीवी कैमरों का प्रस्ताव लाने की घोषणा की थी, मगर ऐसा नहीं हुआ। मंगलवार को हुई बैठक में 1000 इलेक्ट्रिक बसें खरीदे जाने संबंधी अन्य मुद्दों पर तो चर्चा हुई लेकिन उसमें सीसीटीवी शामिल नहीं था।

बता दें कि 4 जुलाई को दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था। उसके ठीक बात दिल्ली सरकार की तरफ से प्रेसवार्ता बुलाकर घोषणा की गई थी कि अब सीसीटीवी कैमरे की योजना को लेकर भी बाधा दूर हो गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वह सीसीटीवी लगाने का प्रस्ताव आगामी मंगलवार यानी 10 जुलाई को होने वाली कैबिनेट की बैठक में लेकर आएं। मगर, मंगलवार को हुई बैठक के बाद जब कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने के लिए दिल्ली सचिवालय में मनीष सिसोदिया ने अपनी बात रखी तो उसमें सीसीटीवी का जिक्र नहीं था। पूछने पर सिसोदिया ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उनका कहना था कि धीरे-धीरे सभी चीजें कैबिनेट में आएंगी। उन्होंने बताया कि एक हजार इलेक्ट्रिक बसें खरीदे जाने के लिए कैबिनेट में चर्चा हुई है मगर इस मुद्दे पर बुधवार को फिर से कैबिनेट बुलाई गई है। जिसमें कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

बता दें कि दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में लगने वाले 1 लाख 40 हजार सीसीटीवी कैमरों के टेंडर के मामले में कुछ माह पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने अनियमितता का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर उपराज्यपाल ने गृह विभाग के प्रधान सचिव मनोज परीदा के नेतृत्व में कमेटी गठित कर दी थी। 30 जून को रिपोर्ट तैयार कर कमेटी ने उपराज्यपाल को सौंपी है। बताया जा रहा है योजना को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए हैं। यह भी कहा गया है कि सीसीटीवी कैमरे के संचालन का काम दिल्ली पुलिस के हाथ में होना चाहिए। सूत्रों की मानें तो जब तक उपराज्यपाल इस रिपोर्ट पर फैसला नहीं देते हैं, योजना पर काम आगे बढ़ पाना संभव नहीं है जबकि सरकार इस योजना को लेकर अब कोई बाधा नहीं मान रही है।

Posted By: Amit Kumar Singh