नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व आम आदमी पार्टी (AAP) पर फर्जी कॉल कर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों से इस झूठ की पोल खुल गई है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर बताया है कि पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार करीब 10 लाख मतदाता बढ़े हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में दिल्ली में कुल एक करोड़ 27 लाख, छह हजार, 366 मतदाता थे, जबकि हाल ही में 18 जनवरी 2019 को जारी नई सूची के अनुसार, मतदाताओं की संख्या एक करोड़, 36 लाख, 95 हजार, 291 हो गई है। कुल नौ लाख 88 हजार, 925 वोट (7.78 फीसद) मतदाता बढ़े हैं।

आयोग ने दिल्ली के मतदाताओं को उनका वोट भाजपा द्वारा कटवाए जाने और केजरीवाल द्वारा जुड़वाए जाने से संबंधित आ रही कॉल से सचेत रहने को कहा है। आयोग ने कहा है कि वोट कटने और जुड़ने की पूरी प्रक्रिया का पालन केवल चुनाव आयोग करता है। अन्य कोई पार्टी, सरकार या व्यक्ति की इसमें कोई भागीदारी नहीं है।

आयोग के निर्देशों को मुख्यमंत्री के झूठ पर जोरदार तमाचा बताते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल जिस तरह झूठ की राजनीति कर रहे हैं, वह एक मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता है। तिवारी ने कहा कि हमने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए आप की मान्यता रद करने और पार्टी का चिन्ह जब्त करने की मांग की है।

इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की जनता से अपील करते हुए कहा कि जिस किसी को भी आप द्वारा ये कॉल आए, वे उसे रिकॉर्ड कर लें और हमें भेजें। वह उस व्यक्ति की गोपनीयता को बरकरार रखते हुए हर कॉल की शिकायत करेंगे और इस झूठ की राजनीति का पर्दाफाश करेंगे। वहीं विजय गोयल ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों से यह साबित हो गया है कि आम आदमी पार्टी लोगों को गुमराह कर रही है, इसलिए उसके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए।

नाकामी और झूठ छिपाने का केजरीवाल का असफल प्रयास
गुप्ता विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए सभी आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। पिछले 10 सालों में 24 लाख वोटरों के नाम कटे हैं। इसमें 10 सालों में निधन होने वाले, फॉर्म 7 भरकर स्वयं नाम कटवाने वाले और कंप्यूटरीकरण के कारण एक मतदाता के डबल वोट की पहचान वाले हैं। इस दौरान 30 लाख नए वोट भी बने हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इसे केजरीवाल तोड़-मरोड़कर पेश कर अपनी नाकामी और झूठ छिपाने का असफल प्रयास कर रहे हैं।