यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jobs News: क्या आप कमाना चाहते हैं आनलाइन की दुनिया में पैसे, इस तरह से करें करियर प्लानिंग
आम बजट में आरबीआइ की ओर से डिजिटल रुपे लांच करने की घोषणा के बाद यह माना जा रहा है ...और पढ़ें

नई दिल्ली [धीरेंद्र पाठक]। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ब्लाकचेन तकनीक के माध्यम से दिया गया राष्ट्रीय बाल पुरस्कार काफी चर्चा में रहा। पुरस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों को डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किया गया, जो पूरे विश्व में मान्य होगा, क्योंकि ऐसे सर्टिफिकेट जाली नहीं हो सकते हैं और कहीं भी आसानी से इनका सत्यापन हो सकेगा। महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों में जमीनों का रिकार्ड रखने में इस तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के और भी उदाहरण देखने को मिलेंगे। ब्लाकचेन को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिये अभी से ही एक क्रांतिकारी तकनीक माना जा रहा है।
आसान शब्दों में इसे डिजिटल सार्वजनिक बही-खाता भी कह सकते हैं, जिसके अंतर्गत किसी भी प्रकार का लेन-देन एक बार दर्ज हो जाने के बाद उसे न तो वहां से हटाया जा सकता है और न ही उसमें संशोधन किया जा सकता है। यहां तक कि साइबर अटैक का भी इस पर कोई असर नहीं होता है।
यही वजह है कि आज तमाम देसी-विदेशी वित्तीय कंपनियां इसके फायदे को देखते हुए इसे अपने कार्यों में शामिल करने पर विचार कर रही हैं।कई कंपनियों ने इसके जरिये वित्तीय सेवाएं देना शुरू भी कर दिया है। सरकारें भी अपने यहां बेहतर गवर्नेंस के लिये ब्लाकचेन तकनीक के इस्तेमाल की योजना बना रही हैं।
तेजी से बढ़ रहा उपयोग
आजकल ब्लाकचेन तकनीक और इसके जानकारों की क्यों बहुत जरूरत देखी जा रही है। इसके पीछे की एक वजह यह है कि ब्लाकचेन एक ऐसी टेक्नोलाजी है जिस पर क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी (डिजिटल एसेट) पूरी तरह टिकी हुई है। आज के समय में क्रिप्टोकरेंसी लगभग विश्व के हर हिस्से में अपनी पहचान बना रही है। अक्सर लोग इसका उपयोग ट्रांजेक्शन के लिए करते हैं और इसको एसेट की तरह भी रखते हैं। अब भारत में भी डिजिटल करेंसी लाये जाने की घोषणा के बाद इस तकनीक की उपयोगिता यहां भी होगी। भारत पूरी दुनिया में साफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए जाना जाता है। यह अनेक विदेशी कंपनियों को साफ्टवेयर डेवलप करके देता है। जानी-मानी कंपनियां जैसे कि टीसीएस, विप्रो, एचसीएल के पास ब्लाकचेन के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं, बैंक भी ब्लाकचेन के उपयोग की दिशा में बढ़ रहे हैं।
जाहिर है, ऐसी जगहों पर ब्लाकचेन के एक्सपर्ट्स की काफी आवश्यकता होगी, जिसके चलते इस क्षेत्र में रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। आइटी, फिनटेक आदि सेक्टर में ब्लाकचेन काफी उपयोग में लिया जा रहा है। इसके अलावा, बैंक्स, पेमेंट गेटवेज, इंटरनेशनल रेमिटेंसेस, एनएफटी आदि सभी कंपनियां भी अपना फ्यूचर बिजनेस ब्लाकचेन में देख रही हैं।
जाब्स के अनेक मौके
ब्लाकचेन एक ऐसी तकनीक है, जो लंबे समय तक बनी रहेगी। यह एक ऐसी जगह है जहां युवा आकर्षक करियर बना सकते हैं। आने वाले वर्षों में इस तकनीक और इसके इस्तेमाल को लेकर युवाओं के लिए विभिन्न रूपों में काफी करियर स्कोप हैं, जैसे- ब्लाकचेन साफ्टवेयर इंजीनियर, ब्लाकचेन प्रोडक्ट मैनेजर, रिस्क एनालिस्ट, टेक आर्किटेक्ट, एनालिस्ट रिलेशंस मैनेजर, क्रिप्टो कम्युनिटी मैनेजर, ब्लाकचेन डेवलपर, ब्लाकचेन क्वालिटी इंजीनियर, ब्लाकचेन एनालिस्ट आदि। आइटी कंपनियां, एमएनसीज, बड़े बैंक, सरकारें और छोटे व्यवसाय ब्लाकचेन पेशेवरों की तलाश में हैं। जानकारों के अनुसार, देश में आने वाले समय में ब्लाकचेन के पेशेवरों की बड़ी संख्या में आवश्यकता पड़ेगी। क्योंकि कामकाज आनलाइन होने के साथ-साथ इनदिनों डाटा की सिक्योरिटी पर भी काफी जोर दिया जा रहा है, इसलिए भी ब्लाकचेन की मांग बढ़ना तय है। फिलहाल, जो युवा इस तकनीक में कुशलता हासिल कर लेंगे, उनके लिए आने वाले दिनों में काफी मौके होंगे।
कोर्स एवं योग्यताएं
ब्लाकचेन का तकनीकी ज्ञान हासिल करने के लिए प्रोग्रामिंग और डाटाबेस की समझ होना आवश्यक है। अगर आपने पहले से ही सीप्लसप्लस, एसक्यूएल, जावा स्क्रिप्ट या पाइथन आदि सीख रखा है, तो ब्लाकचेन को सीखना ज्यादा आसान होगा। इसके अलावा, ब्लाकचेन डेवलपर के रूप में करियर बनाने के इच्छुक लोगों को आइटी, डाटा सिक्योरिटी व कंप्यूटर साइंस का बुनियादी ज्ञान होना आवश्यक है। डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम्स, नेटवर्किंग, क्रिप्टोग्राफी व डाटा स्ट्रक्टर्स की भी अगर आपको समझ है, तो इसका अतिरिक्त फायदा आपको मिलेगा। फिलहाल, इस तकनीक को सीखने के लिए आप आनलाइन कोर्सेज कर सकते हैं। आइआइटी कानपुर ने ब्लाकचेन पर अलग से कोर्स शुरू किये हैं।
आइआइटी मद्रास ने भी ग्रेट लर्निंग के साथ मिलकर ऐसा ही सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। बाकी अन्य संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कोर्स के तहत ही ब्लाकचेन की भी पढ़ाई कराई जाती है। इसके अलावा कोर्सेरा, उडेमी, ईडीएक्स और आइबीएम पर भी इससे संबंधित कोर्स और ट्रेनिंग प्रोग्राम किया जा सकता है। ग्रेटर नोएडा स्थित एनआइईटी समेत कुछ निजी संस्थानों में भी ब्लाकचेन से संबंधित फुलटाइम कोर्स कराया जा रहा है।
आकर्षक पैकेज
ब्लाकचेन लगातार सबसे अधिक भुगतान करने वाले प्रोग्रामिंग क्षेत्रों में से एक है। लेकिन यह भुगतान नौकरी के स्थान, कंपनी, अनुभव और कौशल आदि कारणों से भिन्न-भिन्न हो सकता है। फिलहाल अभी एक ब्लाकचेन डेवलपर्स को 5 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक सालाना पैकेज मिल रहे हैं।
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(विवेक कुमार सिंह, डायरेक्टर, करियरएरा से बातचीत पर आधारित)
प्रैक्टिकल नालेज पर जोर दें युवा
जीएल बजाज इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड मैनेजमेंट, ग्रेटर नोएडा के वाइस चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि ब्लाकचेन तकनीक में सुरक्षा को देखते हुए आने वाले दिनों में सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ता दिखेगा। ऐसे में इसमें रुचि रखने वाले युवाओं को थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नालेज बढ़ाने पर भी भरपूर ध्यान देना चाहिए। सरकार व एआइसीटीई की प्रेरणा से शैक्षणिक संस्थान भी अपने छात्रों को इस तकनीक में कुशल बनाने की पहल कर रहे हैं।

प्रमुख संस्थान
आइआइटी मद्रास/कानपुर
www.iitm.ac.in
आइबीएम
www.ibm.com
जीएल बजाज, ग्रेटर नोएडा
www.glbitm.org