नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली मेट्रो के कई सौ करोड़ रुपये के घाटे समेत कई अन्य मसलों को लेकर  दिल्ली मेट्रो बोर्ड के निदेशकों की शुक्रवार को बैठक हुई। जिसमें कोरोना के कारण प्रभावित हुए परिचालन के बाद मेट्रो की आर्थिक स्थिति और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्टर की सहयोगी कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को भारी भरकम राशि भुगतान करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि इस बैठक में फिलहाल डीएएमईपीएल को भुगतान करने पर फैसला नहीं हुआ है। बोर्ड में इस बात जोर दिया गया कि मेट्रो अभी कानूनी विकल्प पर विचार करेगी। हालांकि, मेट्रो बोर्ड की बैठक में हुए फैसलों पर कोई अधिकारिक तौर पर बयान जारी नहीं किया गया है।

उल्लेखनीय है कि डीएमआरसी ने वर्ष 2008 में डीएएमईपीएल से एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के निर्माण और परिचालन के लिए समझौता किया था। यह दिल्ली की पहली मेट्रो लाइन थी जिसे पीपीपी (सार्वजनिक निजी भागीदारी) के तहत बनाया गया था, लेकिन कारिडोर बनकर तैयार होने और परिचालन शुरू होने के कुछ ही समय बाद कारिडोर में तकनीकी खराबी की बात सामने आई थी। तकनीकी खामी व कारिडोर की मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या अनुमान से कम होने के कारण विवाद बढ़ने पर वर्ष 2013 में डीएमआरसी ने एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर परिचालन की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली थी। इसके बाद डीएएमईपीएल ने मध्यस्थ न्यायाधिकरण में अपील दायर कर डीएमआरसी से नुकसान की भरपाई करने की मांग की। मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने डीएएमईपीएल के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक चला।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी डीएएमईपीएल के पक्ष में आया है। इसके तहत डीएमआरसी को करीब 7100 करोड़ की राशि डीएएमईपीएल को भुगतान करना है। बताया जा रहा है कि बैठक में मेट्रो के अधिकारियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि कोरोना के कारण मेट्रो अभी घाटे में चल रही है। इसकी भरपाई कैसे की जाए इस पर भी चर्चा हुई।

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Edited By: Jp Yadav