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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

2000 के नोटों में 'चिप' से डरे लुटेरे, 10 लाख में से खर्च किए सिर्फ 50 हजार

By JP YadavEdited By:
Published: Tue, 27 Dec 2016 09:37 AM (IST)Updated: Wed, 28 Dec 2016 07:58 AM (IST)

कहीं जाम के कारण बदमाश कैश वैन लूटने की हिम्मत नहीं कर सके तो कहीं एटीएम के सामने लंबी लाइन देख उनके हौसले पस्त हो गए।

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नई दिल्ली (जेएनएन)। पूर्वी दिल्ली के तीन एटीएम पर लूट की वारदात को अंजाम देने में असफल होने के बाद बदमाशों ने पांडवनगर में कैश वैन को लूटा था। कहीं जाम के कारण बदमाश कैश वैन लूटने की हिम्मत नहीं कर सके तो कहीं एटीएम के सामने लंबी लाइन देख उनके हौसले पस्त हो गए।

हालांकि, पांडवनगर में बंद एटीएम पर मौका मिला तो बगैर चूके बदमाश कैश लेकर फरार हो गए। नए नोटों को खर्च करने पर पकड़े जाने के डर से बदमाशों ने सात दिन में महज 52 हजार रुपये ही खर्च किए।

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पूछताछ में तीनों में से एक बदमाश सन्नी ने बताया कि 19 दिसंबर को लूट के इरादे से वे सभी वीथ्रीएस मॉल के पीछे लक्ष्मीदीप बिल्डिंग स्थित कॉरपोरेशन बैंक के पास पल्सर बाइक पर कैश वैन का इंतजार करने लगे। इसी बीच जनकपुरी स्थित ब्रिंक्स सिक्योरिटी की कैश वैन कॉरपोरेशन बैंक के एटीएम में कैश डालने पहुंची, लेकिन क्षेत्र में जाम होने के कारण बदमाश उसे लूट नहीं सके।

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उन्होंने वहां से कैश वैन का पीछा किया और निर्माण विहार स्थित कॉरपोरेशन बैंक के एटीएम पहुंचे। वहां पर बड़ी संख्या में रिक्शा और ई-रिक्शा के खड़े होने के कारण वहां पर लूट कर भागना आसान नहीं था तो उन्होंने वहां भी लूट को अंजाम नहीं दिया।

इसके बाद उन्होंने फिर कैश वैन का पीछा किया और शकरपुर स्थित एसबीआइ बैंक के एटीएम पर पहुंचे तो वहां पहले से ही लंबी लाइन थी। ऐसे में वहां भी लूटना संभव नहीं था। वहां से कैश वैन पांडव नगर स्थित एसबीआइ एटीएम पहुंची। यह एटीएम तकनीकी खराबी के कारण 15 दिनों से बंद था। ऐसे में वहां से वारदात को अंजाम देकर भागना आसान था। बिट्टू पल्सर स्टार्ट करके कुछ दूरी पर खड़ा था, जबकि हथियारबंद रोहित एवं सन्नी वहां पहुंचे और हवाई फायर कर दिया।

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रोहित ने गनमैन को फायरिंग कर दबोच लिया, जबकि सन्नी ने कैश लिए अब्दुल से 500-500 रुपये के नए नोटों के 10 लाख रुपये से भरा बैग छीन लिया। बिट्टू, सन्नी और रोहित शाम को मिले और आपस में बराबर-बराबर रुपये बांट लिए और मामला शांत होने तक वे हरिद्वार चले गए, लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा। वे दोबारा दिल्ली आए और लोकल इलाके में सक्रिय हो गए।