यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 11, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Anti Sikh Riots 1984: आरोपपत्र की जांच के लिए टाइटलर के अधिवक्ता ने मांगा वक्त, अब 21 अगस्त होगी होगी सुनवाई
कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को आज शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली कोर्ट में पेश किया गया जहां अदालत ...और पढ़ें

HighLights
- टाइटलर के वकील ने आरोपपत्र की जांच को मांगा वक्त
- अब 21 अगस्त को होगी मामले की सुनवाई
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। साल 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पुल बंगश हत्याकांड के आरोपित कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली के एक अदालत में शुक्रवार को पेश किया गया है। उन्होंने अदालत में उन्होंने आरोप पत्र सहित सीबीआई द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की जांच करने के लिए 10 दिन का समय मांगा है।
कांग्रेस नेता के वकील ने मांगा समय
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विधि गुप्ता आनंद ने टाइटलर के वकील द्वारा दायर एक आवेदन पर निर्देश पारित किया, जिन्होंने दस्तावेजों की जांच पूरी करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था। कार्यवाही के दौरान टाइटलर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता के वकील की दलील सुनीं, जहां उन्होंने आरोप पत्र की जांच के लिए कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांग की। अब अदालत में इस मामले की सुनवाई 21 अगस्त को दोपहर 2 बजे होगी।
टाइटलर को एक सत्र अदालत ने 4 अगस्त को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर अग्रिम जमानत दे दी थी। अदालत ने उन पर कुछ शर्तें भी लगाईं, जिनमें यह भी शामिल है कि वह मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे या बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे।
मजिस्ट्रेट अदालत ने 26 जुलाई को टाइटलर को 5 अगस्त को तलब किया था। उसने मामले में पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बाद यह आदेश पारित किया।
इससे पहले सीबीआई ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। यह चार्जशीट सीबीआई ने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के दौरान पुल बंगश गुरुद्वारा अग्निकांड में दायर की थी।1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के मामले में अप्रैल माह में जगदीश टाइटलर अपनी आवाज का सैंपल देने के लिए सीबीआई के सामने पेश हुए थे।
2015 में शुरू हुई थी जांच
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख सुरक्षाकर्मियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद हुए दंगे के दौरान दिल्ली में 2,100 सहित पूरे भारत में लगभग 2,800 सिख मारे गए थे। सीबीआई ने पहले इस मामले में कांग्रेस नेता को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन 4 दिसंबर, 2015 के आदेश के बाद जांच फिर से शुरू की।
