नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। नेशनल कान्फ्रेंस के नेता त्रिलोचन सिंह वजीर की हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। हत्यारोपित हरमीत ने दिल्ली पुलिस के समक्ष खुलासा किया है कि त्रिलोचन सिंह मुझे और बेटे को मारने की साजिश रच रहे थे, इसलिए मार डाला। बताया जा रहा है कि एक सितंबर को मैं पश्चिमी दिल्ली के रमेश नगर स्थित दोस्त हरप्रीत सिंह खालसा के घर आ गया था। उसके अगले दिन दो सितंबर को त्रिलोचन सिंह वजीर भी कनाडा जाने के लिए दिल्ली आए। हरप्रीत ने मुझसे कहा कि आप होटल चले जाओ क्योंकि आपमें व उनमें बनती नहीं है। यह सुनकर मैं होटल चला गया। मेरा मोबाइल हरप्रीत के घर रह गया। होटल से जब मैंने उन्हें फोन किया तो फोन नहीं लगा, फिर मोबाइल लेने वापस मैं हरप्रीत के घर आया। दरवाजा बंद था। घर के अंदर से वजीर की आवाज आ रही थी। वह मेरे बारे में बोल रहे थे। वजीर कह रहे थे कि अजीत ने हरमीत, उसके बेटे व सुदर्शन वजीर को खत्म करने के लिए चार करोड़ की सुपारी दी है। दो करोड़ एडवांस भी दिए गए हैं। इसपर हरप्रीत ने वजीर से कहा कि सुदर्शन का तो पता नहीं पर हरमीत तो आपके दोस्त हैं। उनके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए।

वजीर ने कहा कि हरमीत मेरे खिलाफ चलता है। यह सुनकर मुझे बहुत गुस्सा। मैंने आवाज लगाई। हरप्रीत ने दरवाजे से ही मुझे होटल जाने के लिए कहा, लेकिन मैं नहीं गया। मैंने वजीर से कहा कि मुझसे आपकी क्या दुश्मनी है। हमारी कहासुनी होने लगी। हरप्रीत ने बीच बचाव किया। कुछ देर बाद हरप्रीत शीतलपेय लाने चला गए। इसके बाद हमारा फिर झगड़ा हुआ। वजीर गाली गलौज कर अंदर कमरे में चला गया। मुझे पहले ही कुछ लोगों ने चेताया था कि वजीर तुम्हे मारने के लिए तैयारी कर रहा है। इसीलिए मैं अपने पास सुरक्षा के लिए हथियार रखने लगा। इसके बाद मैंने कमरे में जाकर वजीर के सिर पर गोली मार दी।

शक न हो इसलिए फ्लाइट के समय हरप्रीत को मोबाइल लेकर एयरपोर्ट भेजा

गोली चलने की आवाज पर हरप्रीत कमरे में आया और शव देखकर रोने लगा। कहा कि उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। इस पर हरमीत ने उसे हथियार दिखाकर चुप करा दिया। वजीर की फ्लाइट का टाइम हो जाने पर हरमीत ने हरप्रीत को वजीर का मोबाइल लेकर एयरपोर्ट भेज दिया, ताकि पुलिस जांच में वजीर की आखिरी लोकेशन एयरपोर्ट दिखे। हरमीत ने अपने नोट में लिखा कि हरप्रीत काफी डरा हुआ था, वह बार-बार मुझे फोन कर लगा। इस पर मैंने उससे मामले को रफा दफा कराने के लिए कुछ पैसे मांगे। हरप्रीत ने घर का सारा सामान बेचकर पैसे दिए। इसके बाद मैंने हरप्रीत को जम्मू भेज दिया। मैं भी जम्मू चला गया।

गुरुद्वारे में मत्था टेक कर निकले आत्मसमर्पण करने

नोट में हरमीत ने आगे लिखा कि पांच छह दिन बाद जम्मू से दोनों वापस दिल्ली आ गए और आत्म समर्पण करने के लिए विचार बनाया। गुरुद्वारे में मत्था टेकर हमलोग थाने के लिए निकले थे। इस दौरान खाना खाने के लिए एक जगह रुके। इसी बीच हरप्रीत के मोबाइल पर पुलिस के फोन आने लगे। इससे हमलोग डर गए और पंजाब की तरफ भाग गए।

Edited By: Jp Yadav