नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रामा सेंटर में मरीजों के दबाव को देखते हुए बड़े बदलावों के साथ ही एक नई शुरुआत होने जा रही है। कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद एम्स में 265 बेड के ट्रामा सेंटर को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने से पहले ट्रामा इमरजेंसी एरिया का नवीनीकरण किया जा रहा है। साथ ही आपरेशन थियेटर (ओटी) की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में एक अत्याधुनिक हाइब्रिड ओटी बनाया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय से स्वीकृति मिलने के बाद एम्स ने हाइब्रिड ओटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो हादसों में गंभीर रूप से घायल पीड़ितों की त्वरित सर्जरी और उनकी जान बचाने में मददगार होगा।

अभी तक ट्रामा सेंटर में हाइब्रिड ओटी की सुविधा नहीं है। हाइब्रिड ओटी सामान्य ओटी से अलग होगा। यह सीटी स्कैन व रोबोटिक आर्म युक्त एंजियोग्राफी मशीन की सुविधा से युक्त होगा। इसलिए गंभीर हादसा पीड़ितों को आपात सर्जरी से पहले सीटी स्कैन या एंजियोग्राफी के लिए दूसरी जगह लैब में स्थानांतरित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कई बार गंभीर हादसा पीड़ितों को लैब में स्थानांतरित करने के दौरान ही दिल का दौरा पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में मरीज को बचा पाना चुनौतीपूर्ण होता है। हाइब्रिड ओटी में एक ही जगह जांच व सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे समय भी बचेगा और सर्जरी भी जल्दी होगी।

सर्जरी के दौरान रोबोटिक आर्म युक्त एंजियोग्राफी मशीन से पीड़ित के शरीर के अंदरूनी हिस्से में होने वाले रक्तस्राव या ब्लाकेज का पता लगाकर प्रोसिजर किया जा सकेगा। सर्जरी के दौरान इंटरवेंशनल रेडियोलाजी के विशेषज्ञ भी मौजूद होंगे। हाइब्रिड ओटी को जरूरत पड़ने पर सिर्फ जांच (सीटी स्कैन व एंजियोग्राफी) के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को ट्रामा इमरजेंसी में सबसे पहले रेड एरिया में रखा जाता है। इस रेड एरिया में पहले आठ बेड थे। अब इसमें बेड बढ़ाकर दोगुने (16 बेड) किए जा रहे हैं। ट्रामा इमरजेंसी में कम गंभीर व हल्के चोट वाले हादसा पीड़ितों के लिए अलग जगह व्यवस्था होती है। मौजूदा समय में ट्रामा सेंटर की पहली मंजिल पर पांच सामान्य ओटी हैं। इस सामान्य ओटी की संख्या बढ़कर 10 की जाएगी। इससे ट्रामा सेंटर में दोगुने सामान्य ओटी हो जाएंगे। इससे अधिक हादसा पीड़ितों की सर्जरी हो सकेगी। डा. राजेश मल्होत्र, एम्स ट्रामा सेंटर प्रमुख

डे-केयर के लिए बनेगा एक अलग ओटी

ट्रामा सेंटर में हादसा पीड़ितों का दबाव बहुत होता है। इसके मद्देनजर डे-केयर के तर्ज पर हादसा पीड़ितों के इलाज की सुविधा के लिए एक अलग ओटी बनाया जाएगा। हड्डियों में हल्का फ्रैक्चर होने पर इस ओटी में सर्जरी कर चार-पांच घंटे मरीज को निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। इस तरह की छोटी सर्जरी की जरूरत होने पर एक ही दिन में मरीज का इलाज हो जाएगा।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari