यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
60 फीट से चौड़ी सड़कों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी जाएगी दिल्ली सरकार के पास! जानिए इसके नुकसान और फायदे
Delhi Government राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों की साफ-सफाई का जिम्मा भी दिल्ली सरकार के ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों की साफ-सफाई का जिम्मा भी दिल्ली सरकार के पास जा सकता है। इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को देने की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली कैबिनेट इन सड़कों की सफाई पीडब्ल्यूडी से कराने का निर्णय ले चुकी है। अब गेंद एमसीडी के पाले में है।
निगम की 26 अप्रैल को होने वाली बैठक के प्रस्ताव में इस मामले को भी सूचीबद्ध किया गया है। वैसे, उसी दिन महापौर का चुनाव होना है। पूर्व की तरह इस चुनाव में आप प्रत्याशी की जीत होती है तो बहुमत के आधार पर यह प्रस्ताव पारित हो जाएगा, क्योंकि दिल्ली सरकार के निर्णय के आधार पर ही सदन में प्रस्ताव लाया गया है।
फिलहाल दिल्ली में 1,400 किलोमीटर से अधिक लंबी पीडब्ल्यूडी की सड़के हैं, जिसका रखरखाव वह खुद करता है, लेकिन साफ-सफाई का जिम्मा अभी निगम के पास ही है। इसी काम को भी पीडब्ल्यूडी को सौंपने का प्रस्ताव निगम सदन में आने जा रहा है।
वर्ष 2012 में गया था रखरखाव का जिम्मा, अब सफाई की बारीवर्ष 2012 में दिल्ली सरकार ने 60 फिट व उससे अधिक चौड़ी सड़कों के रखरखाव का जिम्मा पीडब्ल्यूडी को दे दिया था और सफाई निगम को। वहीं, इससे कम चौड़ी सड़कों का रखरखाव व सफाई दोनों निगम के पास है।
टिप्पणियों के साथ रखा है प्रस्ताव
दिल्ली सरकार से आए मसौदे को निगम ने सदन के सामने रख जरूर दिया है, लेकिन इस पर कई टिप्पणी भी की है। इसमें एक यह कि निगम का प्राथमिक कार्य ही सफाई हैं। ऐसे में इसमें बदलाव उपराज्यपाल की ही मंजूरी से किया जा सकता है। वैसे, निगम ने दिल्ली सरकार के इस निर्णय का सीधे विरोध नहीं किया है, लेकिन निगम ने कहा है कि वह सफाई से जुड़े कार्यों को करने में सक्षम है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने हाल ही में ऐलान किया था कि वह सड़कों की धुलाई और सफाई कराएगी। साथ ही हर विधानसभा के लिए एक-एक मैकेनिकल स्वीपर भी खरीदने का प्रविधान भी बजट में किया था।
आप से नहीं संभल रही निगम, इसलिए सफाई काम ले रही है दिल्ली सरकार-हर्ष मल्होत्रा
एमसीडी के प्रस्ताव पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम आप से संभल नहीं रही है और सफाई कराने में महापौर विफल है। इसलिए अब सफाई का काम पीडब्ल्यूडी को सरकार देना चाहती। जबकि सफाई को निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मल्होत्रा ने कहा कि जो कर्मचारी अनुबंध पर काम कर रहे हैं उनका इस प्रस्ताव से नौकरी पर संकट आ जाएगा, क्योंकि काम कराएंगे नहीं तो वेतन कैसे देंगे। पीडब्ल्यूडी के पास एक भी कर्मचारी सफाई का नहीं है तो कैसे वह इन सड़कों की सफाई कराएंगे।
क्या होगा नुकसान
- इन सड़कों से मलबा उठाने के लिए निगम ने पहले ही विभिन्न एजेंसियां प्रत्येक जोन में लगा रखी है। ऐसा होने पर वह कंपनियां कोर्ट में जा सकती है।
- यहां पर जो सफाई कर्मी काम करते हैं उनको दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ेगा, यार्ड स्टिक के हिसाब से इन कर्मियों की संख्या निगम के पास सरप्लस हो जाएगी
- निगम ने 52 मैकेनिकल स्वीपर पहले ही इन सड़कों की सफाई के लिए लगा रखे हैं वह अनुपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि वह ट्रक के आकार के हैं और वह निगम के पास 60 फिट से छोटी सड़को पर नहीं चल पाएंगे।
- 18 और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों को खरीदने के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को प्रस्ताव निगम ने भेज रखा है वह रद् कराना पड़ेगा।
- उपराज्यपाल के निर्णय के अनुसार इन सड़को पर रोड कटिंग की इजाजत भी निगम ही देता है।
क्या होगा फायदा
- अभी इन सड़कों की मरम्मत से लेकर रखरखाव का काम पीडब्ल्यूडी के पास है। एक ही एजेंसी दोनों काम देखेगी तो संभवत: इसमें और सुधार होंगे।
- निगम के पास रिहायशी इलाकों की सफाई बचेगी। ऐसे में निगम वहां पर अपने संसाधनों को इन सड़कों से हटाकर लगाएगा तो रिहायशी इलाकों की सफाई बेहतर हो सकती है।
- फंड की कमी से जूझ रहे निगम के पास इन सड़कों की सफाई के लिए होने वाला खर्च कम होगा तो इससे निगम दूसरे विकास कार्य भी कर सकेगा।
- सरकार के पास फंड की कमी नहीं है इससे वह इन सड़को की सफाई के लिए नई-नई मशीनरी भी जरुरत के हिसाब से जल्द से जल्द खरीद सकेगी।
क्या-क्या दिल्ली सरकार के पास चला गया
दिल्ली विधानसभा गठन से पहले दिल्ली नगर निगम के पास पानी से लेकर बिजली, स्लम, परिवहन और फायर सर्विस जैसे विभाग थे, लेकिन वर्ष 1971 में परिवहन अलग कर दिया था। इसके लिए दिल्ली परिवहन निगम नामक एक स्वतंत्र प्राधिकरण बनाया था। इसके बाद वर्ष 1993 में दिल्ली नगर निगम एक्ट में संशोधन के जरिये बिजली और पानी जैसी सेवाएं दिल्ली सरकार के अधीन चली गई।
किसके पास है कितने किलोमीटर की सड़कें
एजेंसी- किलोमीटर
लोक निर्माण विभाग -1440
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग-3.2
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-835
एमसीडी- 15,582
डीएसआईडीसी- 314.5
एनडीएमसी- 135
डीडीए- 340
