नई दिल्ली/नोएडा। [कुंदन तिवारी]। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme court) ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को तत्काल खरीदारों की रजिस्ट्री खोलने के निर्देश दिया है। कोर्ट के इस निर्देश से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के करीब 11 हजार निवेशकों को मालिकाना हक मिल सकेगा। इसमें कोताही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को जेल जाना पड़ सकता है। गलतियां न हो इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ने एक स्पेशल सेल बना दी है। यदि किसी खरीदार को रजिस्ट्री के संबंध में कोई परेशानी या दिक्कत आती है वह सेल के अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। वहीं खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट क ओर से तैनात किए गए रिसीवर से एनओसी लेकर आनाी होगी।

नोएडा की सात व ग्रेटर नोएडा की छह परियोजनाओं के करीब 42 हजार घर खरीदार ने सर्वोच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। इनमें से महज 10 हजार घर खरीदार को ही फ्लैटों पर कब्जा मिल चुका है। वहीं, ग्रेटर नोएडा में करीब 600 घर खरीदारों को कब्जा मिल चुका है। इन सभी को मालिकाना हक अब तक नहीं मिला। मालिकाना हक के लिए रजिस्ट्री होना जरूरी है। बिल्डर पर कई हजार करोड़ रुपये का बकाया होने से प्राधिकरण ने रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछली सुनवाई कहा था कि फ्लैटों पर सिर्फ खरीदारों का ही हक है। मंगलवार को अदालत ने बिना किसी देरी के रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा है। इसके लिए नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शीर्ष अदालत को बताया कि उन्होंने अपने यहां एक स्पेशल सेल बना दी है। रिसीवर से एनओसी लाने वाले प्रत्येक खरीदार की रजिस्ट्री की जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि रजिस्ट्री खोलने में किसी तरह की आनाकानी या खरीदारों को परेशानी हुई तो संबंधित अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। यह आदेश नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को दिए है। बता दें 2009 में निवेशकों ने घर बुक कराए थे। इसमें से दस हजार लोगों को ही फ्लैट पर कब्जा मिल सका है।

पांच साल बाद मिलेगा मालिकाना

हक, क्या मिलेंगी सभी सुविधानेफोवा संस्थापक इंद्रीश कुमार ने बताया कि आम्रपाली समूह ने पहली बार 2014 में पजेशन देना शुरू किया। इसके बाद प्रति वर्ष व छह माह में पजेशन दिया गया। मजबूरन खरीदार ने आधी अधूरी बनी परियोजना में अपने फ्लैटों पर कब्जा लिया। अब सवाल यह है कि मालिकाना हक मिलने के बाद क्या उन सुविधाओं को एनबीसीसी पूरा करेगी जिसे आम्रपाली समूह ने ब्रॉशर में दिखाकर फ्लैट बेच दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आम्रपाली के फ्लैट खरीदारों के लिए राहत देने वाला है। लेकिन ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के प्रोजक्टों में फ्लैट खरीदने वालों को अभी इस आदेश का लाभ मिलने में समय लगेगा। दरअसल, ग्रेटर नोएडा में एक प्रोजेक्ट को छोड़कर आम्रपाली के बाकी प्रोजेक्टों में निर्माण अधूरा है। फ्लैटों के सिर्फ ढांचे खड़े हुए हैं। बिजली, पानी, सुरक्षा, सीवर, सीढ़ियां व लिफ्ट के कोई इंतजाम नहीं हैं। किसी भी प्रोजेक्ट में आग से बचाव के उपकरण नहीं लगे हैं। जब तक फ्लैटों का निर्माण पूरा नहीं हो जाएगा, तब तक कंप्लीशन प्रमाण पत्र और फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। इस वजह से ग्रेटर नोएडा के प्रोजेक्टों में फ्लैटों पर कब्जा लेने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरणों को निर्देश देते हुए कहा कि आम्रपाली के प्रोजेक्टों में तत्काल फ्लैटों के कंप्लीशन प्रमाण पत्र जारी कर उनकी रजिस्ट्री खोली जाए। ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के सात प्रोजेक्ट हैं। चाई-फाई सेक्टर स्थित कैसल प्रोजेक्ट को छोड़ दे तो बाकी में फ्लैटों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। लेजर वैली में सिर्फ ढांचा खड़ा है। कैसल प्रोजेक्ट में करीब 1500 फ्लैट बने हैं। अधिकांश में लोग रह रहे हैं। हालांकि, किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कैसल प्रोजेक्ट के खरीदारों को फ्लैटों का मालिकाना हक मिल सकता है।

लेजर वैली के विला खरीदारों की हो सकेगी रजिस्ट्री

आम्रपाली ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित लेजर वैली में करीब 800 विला बनाए हैं। ढाई सौ विला में लोगों ने रहना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने खर्चे से विला का अधूरा निर्माण कार्य पूर्ण कराया। अब इनकी रजिस्ट्री हो सकेगी।

आम्रपाली के 22 हजार फ्लैट खरीदार हैं ग्रेटर नोएडा में

आम्रपाली बिल्डर के ग्रेटर नोएडा में छह प्रोजेक्टों के लिए 305.7 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। इनमें करीब 22 हजार फ्लैट खरीदार हैं। बिल्डर ने प्राधिकरण को मात्र 363 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। जबकि आवंटित भूखंडों पर हाउसिंग परियोजना लांच कर बिल्डर ने हजारों फ्लैटों की बुकिंग कर निवेशकों से 12 हजार करोड़ रुपये वसूल कर लिए थे, लेकिन फ्लैटों का निर्माण नहीं किया।

अधूरी परियोजनाओं का निर्माण करेगी एनबीसीसी

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली बिल्डर की रुकी परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए नेशनल बिलिं्डग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) को जिम्मेदारी सौंपी है। एक को छोड़कर बाकी सभी परियोजना अधूरी हैं। बिल्डर को 85 फीसद रकम का भुगतान कर चुके निवेशक वर्षों से परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

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Posted By: JP Yadav

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