40000 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस, विशेष CBI कोर्ट ने वैशाली माने के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े 40 हजार करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने वैशाली माने के खिलाफ खुला गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
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राउज एवेन्यू कोर्ट।
HighLights
वैशाली माने के खिलाफ खुला गैर-जमानती वारंट जारी।
40 हजार करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला।
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़ा है यह प्रकरण।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकाम) से जुड़े करीब 40 हजार करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 14 अक्टूबर को आरोपी वैशाली माने के खिलाफ खुला गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है।
विशेष न्यायाधीश अजय गुलाटी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। ईडी ने इस मामले में वैशाली माने के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए खुला गैर-जमानती वारंट जारी करना उचित है।
रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया कि वारंट तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक उसे तामील नहीं करा दिया जाता या अदालत उसे निरस्त नहीं कर देती। साथ ही जांच एजेंसी को वैशाली माने के सत्यापित ठिकाने और वारंट तामील कराने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
2015 से अमेरिका में रहने की जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वैशाली माने के खिलाफ पहले जारी गैर-जमानती वारंट तामील नहीं हो सके थे। इस संबंध में जांच एजेंसी ने स्थिति रिपोर्ट और पंचनामा भी दाखिल किया था।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने वैशाली माने के अंतिम ज्ञात पते पर जाकर जानकारी जुटाई थी। वहां उनकी मां ने बताया कि वैशाली माने वर्ष 2015 में शादी के बाद से अमेरिका में रह रही हैं और वर्ष 2021 में आखिरी बार भारत आई थीं।
ईडी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि इससे पहले 27 अप्रैल को भी वैशाली माने के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। जांच में शामिल होने के लिए उन्हें ईमेल और वाट्सएप सहित विभिन्न माध्यमों से नोटिस और समन भेजे गए थे, लेकिन वह पेश नहीं हुईं।
इनकार की रिपोर्ट प्राप्त
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 19 फरवरी को जारी समन में वैशाली माने को दो मार्च को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। हालांकि, समन के संबंध में इनकार की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। इसके बाद भी उनके जांच में शामिल नहीं होने पर ईडी ने अदालत से वारंट जारी करने का अनुरोध किया था।
इस मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व निदेशक पुनीत नरेंद्र गर्ग जनवरी 2026 में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी आरकाम और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है।
