दिल्ली में शिक्षा-स्वास्थ्य का मेगा प्लान तैयार, नरेला में बनेगा एजुकेशन हब; अस्पतालों का नेटवर्क होगा मजबूत
दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मास्टर प्लान 2047 के तहत नरेला में 138 हेक्टेयर का एजुकेशन हब विकसित किया जाएगा।

दिल्ली में 138 हेक्टेयर में बनेगा एजुकेशन हब। फोटो: आर्काइव
HighLights
नरेला में 138 हेक्टेयर का एजुकेशन हब बनेगा
स्कूलों के लिए निर्माण क्षेत्र (FAR) बढ़ाया जाएगा
दिल्ली में नए मेडिकल कॉलेजों हेतु जमीन चिह्नित होगी
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए नरेला में 138 हेक्टेयर में एजुकेशन हब विकसित करने की योजना है। यहां पर विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, कौशल प्रशिक्षण केंद्रों और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा।
वहीं, दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं का नेटवर्क मजबूत करने का भी प्रविधान है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मंगलवार को मास्टर प्लान 2047 से जुड़े नौवें और दसवें हितधारक परामर्श सत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की योजनाओं पर चर्चा की।
इन बैठकों में शिक्षा विभाग, स्कूलों, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और केंद्र व दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
स्कूलों को अतिरिक्त सुविधाओं के लिए मिलेगा अधिक निर्माण क्षेत्र
एमपीडी-2047 में स्कूलों के लिए अधिक फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) का प्रविधान किया गया है, ताकि पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं विकसित की जा सकें।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र खोलने के साथ आवासीय स्कूलों की स्थापना की भी अनुमति देने का प्रविधान है। नरेला में डिजिटल परीक्षा केंद्रों के लिए उपयुक्त जमीन चिह्नित करने का सुझाव भी आया।
मेडिकल कॉलेजों के लिए जमीन चिह्नित करने पर जोर
मेडिकल हब से जुड़ी बैठक में दिल्ली में अतिरिक्त मेडिकल कॉलेजों के लिए जमीन चिह्नित करने और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के अनुरूप मास्टर प्लान के प्रविधानों में बदलाव की जरूरत उठाई गई।
योजना में सामान्य अस्पतालों के साथ विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा केंद्र, मेडिकल कॉलेज और वेलनेस सेंटर विकसित करने की परिकल्पना है।
इसके अलावा नशामुक्ति केंद्र, पुनर्वास केंद्र, लंबे समय तक देखभाल की सुविधाएं और स्वास्थ्य लाभ के दौरान अस्थायी आवास जैसी सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
पार्किंग और निर्माण नियमों पर भी सुझाव
हितधारकों ने स्कूलों और नर्सिंग होम के लिए पार्किंग मानकों, स्कूलों के भूखंड पर निर्माण और जमीन के अधिकतम उपयोग से जुड़े नियमों में स्पष्टता की जरूरत बताई।
मौजूदा नर्सरी स्कूलों और नर्सिंग होम के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई संबंधी नियमों में संभावित छूट, बेसमेंट के उपयोग और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी सुझाव दिए गए।
डीडीए के अनुसार, एमपीडी-2047 को अधिक व्यावहारिक और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए तीन महीने तक परामर्श कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
इसके तहत करीब 20 बैठकें आयोजित की जानी हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के सुझावों को मास्टर प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन में शामिल किया जा सके।
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