5 करोड़ यात्रियों की पसंद बनी नमो भारत, दिल्ली-मेरठ रूट पर बड़ी कामयाबी; पानीपत-अलवर कॉरिडोर क्यों अटका?
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर जल्द ही 5 करोड़ यात्री फेरों का आंकड़ा छूने वाला है, जो क्षेत्रीय परिवहन का प्रमुख विकल्प बन गया है।

तीन साल में पांच करोड़ यात्रियाें की सवारी बनी नमो भारत ट्रेन। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली-मेरठ नमो भारत जल्द 5 करोड़ यात्री फेरे पूरे करेगा
अन्य कॉरिडोर दिल्ली-पानीपत, दिल्ली-अलवर मंजूरी की राह पर
उच्च लागत और विस्तृत जांच से परियोजनाओं में देरी
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। 82 किमी लंबे दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर चरणबद्ध रूप से परिचालन आरंभ होने के केवल तीन साल के भीतर यह जल्द ही पांच करोड़ यात्री फेरों का आंकड़ा छूने जा रहा है।
1.1 लाख से अधिक दैनिक यात्रियों के साथ यह क्षेत्रीय परिवहन का प्रमुख विकल्प बन कर उभर रहा है। एक दिन में 1.68 लाख से अधिक यात्रियों का रिकार्ड भी बन चुका है।
अक्टूबर 2023 में साहिबाबाद-दुहाई के 17 किमी प्राथमिक खंड के उद्घाटन से शुरू हुआ सफर फरवरी 2026 में पूरे कॉरिडोर तक पहुंचा। लेकिन नमो भारत के विस्तार की रफ्तार अभी एक ही कॉरिडोर तक सीमित है।
दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर कॉरिडोर की परियोजनाएं वर्षों से प्रक्रिया में हैं, दोनों को केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
2017 में चर्चा, अब तक नहीं शुरू हुआ निर्माण
दिल्ली- गुरुग्राम-अलवर नमो भारत कॉरिडोर पर अप्रैल 2017 में हितधारकों की बैठक हुई थी। उस समय दिल्ली से अलवर तक करीब 198 किमी लंबे कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया था।
बाद में इसे चरणों में विकसित करने की योजना बनी। पहले चरण में दिल्ली के सराय काले खां से गुरुग्राम होते हुए एसएनबी तक कॉरिडोर प्रस्तावित किया गया।
एनसीआरटीसी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से बहरोड़ तक के नमो भारत कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजी गई है। परियोजना की मंजूरी, वित्तीय भागीदारी और विभिन्न स्तरों पर परीक्षण इसकी प्रगति के अहम पड़ाव हैं।
करनाल तक विस्तार, संशोधित रिपोर्ट पर फैसला बाकी
दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर को आगे करनाल तक बढ़ाने का प्रस्ताव हरियाणा सरकार ने दिया था। संशोधित मार्ग, स्टेशन और तकनीकी जरूरतों के आधार पर संशोधित रिपोर्ट अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजी गई।
दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, संशोधित कॉरिडोर की लंबाई 136.30 किमी प्रस्तावित है। इसमें दिल्ली, सोनीपत, गन्नौर, समालखा, पानीपत और करनाल के क्षेत्र शामिल होंगे।
परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल केंद्र की मंजूरी इस परियोजना की सबसे अहम बाधा है।
लागत और मंजूरी की प्रक्रिया बना रही देरी
केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि नमो भारत परियोजनाओं की लागत अधिक होने के कारण इनकी विभिन्न स्तरों पर विस्तृत जांच होती है।
वित्तीय सहायता का फैसला परियोजना की व्यवहार्यता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है। ऐसे में दोनों कॉरिडोर के लिए मंजूरी और वित्तीय प्रतिबद्धता तय होना निर्माण शुरू होने की दिशा में निर्णायक होगा।
यह भी पढ़ें- ट्रेनों में खाने को लेकर रेलवे का बड़ा फैसला, IRCTC और QCI में करार; 24 घंटे में मिलेगी जियो-टैग रिपोर्ट
