विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हर महीने पांच जिंदगियां निगल रही दिल्ली की ‘डेथ कैनाल’, पहचान में छूट जाता है प्रशासन का पसीना

Published: Wed, 28 Jan 2026 09:44 PM (IST)

दिल्ली की मुनक नहर पर स्थित हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास हर माह औसतन पांच शव मिलते हैं। 2025 ...और पढ़ें

मुनक नहर पर स्थित हादरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हर माह मिलते हैं पांच शव। जागरण

मुनक नहर पर स्थित हादरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हर माह मिलते हैं पांच शव। जागरण

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

शमसे आलम, बाहरी दिल्ली। दिल्ली के लोगों की प्यास बुझाने वाली मुनक नहर पर स्थित हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास लगाए गए जाल में हर माह औसतन पांच शव फंसते हैं। ये शव कई बार ऐसी हालत में होते हैं कि इनकी पहचान मुश्किल हो जाती है।

ऐसे में पुलिस को इन मामलों को सुलझाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है। दिल्ली पुलिस की आंकड़ों के मुताबिक हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास वर्ष 2025 में जनवरी से 31 दिसंबर तक 60 शव मिले थे। इनमें से 37 शवों की ही शिनाख्त हो पाई है। बाकी अन्य शवों की शिनाख्त में पुलिस जुटी हुई है।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अधिकतर मृतकों के पास से कोई पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिलते हैं। ऐसे में उनकी पहचान करवाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में बीटिंग रिट्रीट के चलते हिंडन एयरपोर्ट से उड़ानें हो सकती हैं बाधित, एयरलाइन्स को किया अलर्ट

रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि यदि किसी शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के साथ किसी तरह से बल प्रयोग करने की बात सामने आती है, तब पुलिस इस बाबत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई करती है।

इस वर्ष अब तक जो शव बरामद हुए, उनमें कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में बिसरा रिपोर्ट आने का इंतजार है। बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस इस मामले में कार्रवाई करेगी।

कहां से आते हैं ये शव

हरियाणा के करनाल से निकलने वाली 102 किलोमीटर लंबी मुनक नहर दिल्ली के हैदरपुर वाटर प्लांट तक पहुंचती है। रास्ते में न कोई सुरक्षा, न रोकथाम, न निगरानी है। इस वजह से हरियाणा या दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में नहर में फेंकी गई लाशें अंत में प्लांट के पास लगाए गए जाल में फंस जाती हैं। जैसे ही शव मिलता है यहां तैनात सिंचाई विभाग का कर्मचारी तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दे देता है।

सबूत मिटाने के लिए नहर में शव फेंक देते हैं अपराधी

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हत्या कर शव ठिकाने लगाने से लेकर सबूत मिटाने के लिए हथियार और गाड़ियां भी इसी नहर में फेंकी जाती हैं। हर महीने तीन-चार शव मिलते हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसके बाद पुलिस शव की पहचान करने का प्रयास शुरू करती है। कई बार शव की पहचान नहीं होने पर पुलिस को ही अंतिम संस्कार तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।

नंबर गेम

KN काटजू मार्ग थाना क्षेत्र (39 शव)

  • पहचान हुई: 25 शव
  • हत्या से मौत: 05
  • डूबने से मौत: 20
  • अज्ञात/अपहचान: 14

बादली थाना क्षेत्र (21 शव)

  • पहचान हुई: 12 शव
  • हत्या से मौत: 02
  • डूबने से मौत: 10
  • अज्ञात/अपहचान: 09

कुल आंकड़े 

क्षेत्र कुल शव पहचान हुई हत्या डूबने से मौत अपहचान
KN काटजू मार्ग थाना 39 25 05 20 14
बादली थाना 21 12 02 10 09
कुल 60 37 07 30 23
 

हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास नहर में लगे जाल में शव मिलने पर पुलिस उसे 72 घंटे तक शव गृह में रखती है। इस दौरान पुलिस मृतक की शिनाख्त के लिए समाचार पत्र में विज्ञापन के साथ साथ दिल्ली पुलिस के जिपनेट पर मृतक की तस्वीर को प्रकाशित करती है। इस साल जितने शव बरामद हुए, आशंका है कि उनमें से अधिकांश लोगों की नहर में डूबने से मौत हुई थी। हालांकि इन शवों की बिसरा रिपोर्ट का इंतजार है।

-

राजीव रंजन, रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।