पहले अमीर लोगों के घर लगवाता था नौकरी, फिर चोरियां कराने वाला राजू मुखिया गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने मुखिया गिरोह के सरगना राहुल उर्फ राजू मुखिया को गिरफ्तार किया है। वह प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से अमीर घरों में घरेलू सहायक लगवाकर चोरियां करवाता था।

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated
HighLights
मुखिया गिरोह का सरगना राहुल उर्फ राजू मुखिया गिरफ्तार।
प्लेसमेंट एजेंसी से घरेलू सहायक लगवाकर घरों में चोरी करवाता था।
दिल्ली-हरियाणा में वांछित, तीन मामलों में भगोड़ा घोषित।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से पुरुषों व युवतियों को अमीर लोगों के यहां नौकरी पर रखवा चोरियां कराने वाले मुखिया गिरोह के सरगना राहुल उर्फ ''राजू मुखिया'' को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है। वह दिल्ली व हरियाणा के चार मामले में वांछित था। तीन मामलों में विभिन्न अदालतों ने उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर रखा था।
डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के मुताबिक राहुल, मधुबनी, बिहार का रहने वाला है उसे द्वारका स्थित नांगली इलाके से गिरफ्तार किया गया। कई मामलों में वह पहले गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन जमानत मिलने के बाद उसने समर्पण नहीं किया और अदालत के समक्ष पेश होने में बार-बार असफल रहा।
मुखिया नाम से गिरोह चलाता है सरगना राहुल
राहुल, मुखिया गिरोह का सरगना है जो संगठित रूप से घरों में डकैती डालने की वारदातों में शामिल रहा है। वह ऐसे आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों की पहचान करता था जिन्हें घरेलू सहायक व सहायिकाओं की आवश्यकता होती थी। उसके बाद प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से उनसे संपर्क साध आरोपित उनके घरों में पुरुषों और महिलाओं को रणनीति के तहत नौकरी पर रखवा देता था।
नौकरी करने के दौरान जल्द घर के वे घर के सभी सदस्यों का विश्वास जीतने के बाद लोगों की आवाजाही और घर में नकदी व गहने रखे होने की जानकारी जुटा लेते थे। विश्वास जीतने के बाद वे अपने गिरोह के सदस्यों को वारदात को अंजाम देने के लिए सूचित कर देते थे। उसके बाद गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर वे लोग घरों में रखे नकदी, जेवरात व अन्य कीमती सामान गायब देते थे।
दिल्ली व हरियाणा के चार मामलों में वांछित था आरोपित
राजधानी में संगठित अपराध, रंगदारी, हथियारों से हमला और अवैध रूप से हथियारों के इस्तेमाल की घटनाओं में हालिया वृद्धि को देखते हुए क्राइम ब्रांच, कुख्यात अपराधियों की पहचान करने तथा उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आपरेशन तेज़ कर दिया है। इसी क्रम में एसीपी भगवती प्रसाद व इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार की टीम ने 30 मार्च को नंगली क्षेत्र से राहुल को गिरफ्तार कर लिया।
क्या है पूरा मामला?
14 मार्च 2016 को, राजौरी गार्डन निवासी डॉ. प्रवेश मिगलानी ने पुलिस में शिकायत कर बताया था कि उन्होंने दो घरेलू सहायक दीपक और राजू को काम पर रखा था। घटना की रात, डॉ. मिगलानी और उनका परिवार रात के खाने के लिए बाहर गया हुआ था। जब वे वापस लौटे, तो उन्होंने पाया कि घर के ताले टूटे हुए थे और लगभग 30 लाख नकदी और गहने गायब थे। जांच के दौरान पता चला कि राहुल मुखिया ने अपने साथियों राजू और रामसुख के साथ मिलकर चोरी की थी। इसके आधार पर राजौरी गार्डन में मामला दर्ज कराया गया था।
24 सितंबर 2014 को, गुरुग्राम की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके घरेलू सहायक राहुल ने उसकी चाय में कोई नशीला पदार्थ मिला दिया और अपने साथियों राम आशीष मुखिया, सीताराम और सुरेश राम के साथ मिलकर उन घर से एक करोड़ नकदी और गहने चुरा लिए। इसके आधार पर गुरुग्राम में मामला दर्ज कराया गया था।
केयरटेकर से बन गया शातिर चोर
राहुल इस समस नांगली इलाके में रह रहा था। 2006 और 2011 के बीच, उसने एक केयरटेकर के रूप में काम किया। इस दौरान, वह पास के ही एक गांव के रहने वाले रामसुख के संपर्क में आया, जिसने उसे ऐसे घरों के एक नेटवर्क से मिलवाया, जहां उनके जान-पहचान वाले लोग घरेलू नौकर के तौर पर काम करते थे। इसके बाद, राहुल ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसे जमा करने के इरादे से ऐसे घरों में चोरी करने का प्रस्ताव रखा।
योजना पर काम करते हुए, उसने मालकिन को चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। जब वह बेहोश हो गई, तब उसने उसके हाथ-पैर बांध दिए और नकदी तथा गहने लेकर फरार हो गए। बाद में, राहुल ने घरेलू सहायक और सहायिकाओं का एक नेटवर्क बनाकर भारत के विभिन्न हिस्सों में अपनी आपराधिक गतिविधियों का विस्तार किया। इस नेटवर्क का इस्तेमाल उसके गिरोह द्वारा घरों में चोरी और सेंधमारी की वारदातों को अंजाम देने में किया जाता था।
