'एक परीक्षा भविष्य तय नहीं करती', स्कूलों में काउंसलिंग शुरू, ये हैं तनाव दूर करने के लिए एक्सपर्ट्स के टिप्स
12वीं के छात्रों को नीट परीक्षा रद होने या बोर्ड परिणामों से उपजे तनाव और भविष्य की चिंताओं से निपटने ...और पढ़ें

तनाव दूर करने के लिए एक्सपर्ट ने दिए टिप्स। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
स्कूलों में छात्रों के लिए काउंसलिंग और करियर वर्कशॉप जारी
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बच्चों पर दबाव न डालने की सलाह दी
छात्रों को अपनी पसंद और क्षमता पहचानकर आगे बढ़ने को कहा
शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। 12वीं कक्षा में विद्यार्थियों का प्रदर्शन, अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं और भविष्य को लेकर चिंता अक्सर तनाव को जन्म दे सकती हैं। इस समय नीट परीक्षा रद होने या बोर्ड परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिलने से विद्यार्थियों की चिंता बढ़ी हुई है।
एक्सपर्ट्स की मानें तो यह प्रक्रिया स्वाभाविक है, लेकिन जरूरी है इन भावनाओं को समझें और जल्द ही सामान्य स्थिति में लौटें। छात्रों का मानसिक तनाव दूर करने के लिए कई स्कूलों ने काउंसलिंग शुरू की है। परीक्षार्थी अपनी शंकाएं और करियर दुविधाएं साझा कर सकें और घबराहट या निराशा का शिकार ना हों यही मकसद है।
स्कूलों में मनोवैज्ञानिकों, करियर काउंसलरों और शिक्षकों की मदद से विद्यार्थियों को भावनात्मक सहयोग और सही मार्गदर्शन दिया जा रहा है और करियर विकल्पों के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वे सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
स्कूलों में चल रही काउसिलिंग और करियर गाइडेंस वर्कशॉप
एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, पुष्प विहार की प्रिंसिपल अमीता मोहन का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता और परिणाम विद्यार्थियों पर भावनात्मक रूप से भारी पड़ सकते हैं। स्कूल में काउंसलरों के साथ नियमित बातचीत, वेलनेस सेशन, करियर गाइडेंस वर्कशाॅप जारी हैं।
अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जा रही है, ताकि बच्चों को कोई तनाव हो तो तुरंत एक्सपर्ट मदद मिल सके। बच्चों को स्कूल और घर दोनों जगहों पर भावनात्मक सहयोग मिलना जरूरी है। सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से ही वे आत्मविश्वास और उम्मीद के साथ आगे बढ़ेंगे।
बच्चों पर न डालें दबाव, भरोसा जताएं
कोई एक परीक्षा विद्यार्थियों के भविष्य को तय नहीं करती। माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न डालें और तुलना करने से बचें। बच्चों की बात सुनें, उनके डर को समझें और उन्हें यह भरोसा दें कि हर समस्या का समाधान है।
छात्र रोजाना रूटीन बनाएं, इंटरनेट मीडिया से थोड़ी दूरी रखें, पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम करें। परिवार के साथ खुलकर बातचीत तनाव कम करने में मदद करती है। जरूरत महसूस होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच न करें।
- डाॅ. गौरव गुप्ता, सीनियर साइकियाट्रिस्ट, तुलसी हेल्थकेयर
अपनी पसंद और क्षमता पहचानें, आगे बढ़ें
परिणाम आने के बाद कई छात्र अपने भविष्य को लेकर उलझन, दबाव और असमंजस महसूस करते हैं। ऐसे समय में सही करियर मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। छात्रों को चाहिए कि वे अपनी पसंद और क्षमता को पहचानें।यह समझें कि किसी परीक्षा में देरी या सही स्कोर नहीं करना कोई बाधा नहीं है और करियर विकल्पों की भरमार है। माता-पिता बच्चों की रुचि को महत्व दें और उन पर अपनी पसंद न थोपें।
- डाॅ. सौरभ कुमार, करियर काउंसलर और शिक्षा नेशन के फाउंडर
छात्रों के लिए सलाह
- अपनी भावनाओं को पहचानें और स्वीकार करें।
- अंकों को अपनी योग्यता का निर्धारण न करने दें।
- पछतावे के बजाय भविष्य पर करें फोकस।
- मन की बात भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें।
- दूसरों से न करें तुलना।
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