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संपत्तिकर माफी के बावजूद लक्ष्य से चूका MCD, 3500 करोड़ के टारगेट से 400 करोड़ पीछे

Published: Thu, 02 Apr 2026 12:00 AM (IST)

एमसीडी ने वित्त वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर से ₹3500 करोड़ के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया, ₹3116 करोड़ ...और पढ़ें

एमसीडी ने वित्त वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर से ₹3500 करोड़ के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया। फाइल फोटो

एमसीडी ने वित्त वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर से ₹3500 करोड़ के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया। फाइल फोटो

निहाल सिंह, नई दिल्ली। सालभर संपत्ति मालिकों को बकाया संपत्तिकर पर छूट देने के बाद भी एमसीडी संपत्तिकर से राजस्व में तय लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं कर पाया है। भले ही निगम के संपत्तिकर से राजस्व में 46 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है लेकिन 3500 करोड़ के लक्ष्य से निगम 400 करोड़ दूर रह गया है।

निगम को वित्त वर्ष 2025-26 में संपत्तिकर से 3116 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। जबकि निगम ने वर्ष 2024-25 में संपत्तिकर से राजस्व का 4000 करोड़ का लक्ष्य रखा था जो कि पूरा न होने की संभावना को देखते हुए इस लक्ष्य में 500 करोड़ की कटौती की गई थी।

एमसीडी के अनुसार 3116 करोड़ का राजस्व 13,52,562 संपत्तिकर दाताओं से प्राप्त हुआ है। जबकि 2024-25 में एमसीडी को 1133161 करदाताओं से 2132.89 करोड़ का राजस्व मिला था।

निगम के अनुसार संपत्ति कर माफी योजना 2025-26 संपत्तिकर निपटान योजना (सुनियो) में 2,06,861 करदाताओं 1236 करोड़ रुपये का संपत्तिकर मिला है। इसमें से 242.87 करोड़ रूपये 1.47 लाख से अधिक आवासीय संपत्तियों से तथा 993.52 करोड़ रुपये 59 हजार से अधिक गैर-आवासीय संपत्तियों से मिला है।

इसके अतिरिक्त, 1,11,909 नए करदाताओं ने सुनियो योजना का लाभ उठाते हुए पहली बार संपत्ति कर का भुगतान किया है। जिससे 448.89 करोड़ रूपये का राजस्व मिला है। उल्लेखनीय है कि निगम के एकीकरण के बाद वर्ष 2023-24 में निगम को 2417 करोड़ का राजस्व मिला था लेकिन 2024-25 में यह 2132 करोड़ ही हो पाया था।

टैक्स नेट में नहीं आ पा रही रिहायशी संपत्ति

एमसीडी की संपत्तिकर के पुराने करो की माफी का असर ईमानदार करदाताओं पर पड़ रहा है। जो करदाता वर्षों से समय पर संपत्तिकर का भुगतान कर रहे थे उनके लिए तो कोई छूट नहीं दी गई है जबकि जो वर्षों से एमसीडी को टैक्स न देकर चूना लगा रहे थे उनका ब्याज और जुर्माना सुनियो योजना के तहत माफ किया जा रहा है। इसको लेकर ईमानदारी से कर जमा करने वाले करदाताओं में रोष व्याप्त है।

निगम के ही आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सुनियो योजना का लाभ आम नागरिकों से ज्यादा व्यावसायिक नागरिकों को ज्यादा हो रहा है। क्योंकि 59 हजार व्यावसायिक संपत्ति मालिकों से 993.52 करोड़ का राजस्व मिला है। जबकि 1.47 लाख रिहायशी संपत्ति मालिकों से मात्र 242.87 करोड़ ही मिला है। व्यावसायिक संपत्ति मालिकों ने अगर ब्याज और जुर्माने समेत भुगतान किया होता तो निगम को छह से सात हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता।

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