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महिलाओं की सुरक्षा पर बजट का संकट, पार्कों में गार्ड तैनात करने के लिए MCD के पास पैसों की कमी

Published: Thu, 24 Sep 2026 05:40 AM (IST)

एमसीडी को पार्कों में सुरक्षा गार्ड तैनात करने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए सालाना ...और पढ़ें

दिल्ली के पार्कों में सुरक्षा गार्ड तैनात करना एमसीडी के लिए बड़ी चुनौती। (एआई जेनरेटेड इमेज)

दिल्ली के पार्कों में सुरक्षा गार्ड तैनात करना एमसीडी के लिए बड़ी चुनौती। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. पार्कों में सुरक्षा गार्ड के लिए 700 करोड़ रुपये की आवश्यकता।

  2. एमसीडी पहले से ही रखरखाव और कर्मचारियों की कमी से जूझ रही।

  3. महिला सुरक्षा के मद्देनजर पार्कों में गार्ड लगाना मुश्किल।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। महिला सुरक्षा के मद्देनजर पार्कों में सुरक्षा आडिट करने के निर्देश के बाद एमसीडी में यह आंकलन शुरू हो गया है कि गार्ड लगाने की जरुरत पड़ी तो इसके लिए कितने फंड की आवश्यकता होगी। क्योंकि अभी स्वयं निगम पार्कों की मरम्मत, रखरखाव और कर्मियों की कमी से ही जूझ रहा है।

कई बार निगम की बैठकों में यह मुद्दा भी उठा है कि एमसीडी के पार्क अपने पार्कों की चार दिवारी तक के लिए फंड की कमी है। इतना ही नहीं पार्कों हरे-भरे दिखे इसके लिए माली भी पर्याप्त नहीं है। तीन हजार कर्मचारी माली के तौर पर आउटसोर्स किए हुए हैं। वह भी बमुश्किल हो पाए हैं।

करीब 700 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त फंड चाहिए

एमसीडी अधिकारियों की माने तो 16 घंटे एमसीडी के बड़े पार्क खोले जाते हैं। ऐसे में 15000 पार्कों के लिए भी अगर दो शिफ्ट के लिए दो माली प्रति पार्क चाहिए तो इसके लिए 30 हजार मालियों की जरूरत होगी। इसके लिए करीब 700 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त फंड चाहिए होगा। जो कि एमसीडी के लिए आवंटित करना चुनौती पूर्ण है।

एमसीडी अधिकारियों की माने तो वह उन्हीं पार्कों में चौकीदार रखते हैं जहां पर उनके स्टोर हैं। ऐसे में करीब 200 पार्क ऐसे होंगे जहां पर यह जरुरत होती है। शेष पार्कों में चौकीदार की तैनाती नहीं हो पाती है।

स्कूल और अस्पताल भी चौकीदारों की कमी से जूझ रहे 

इतना ही नहीं एमसीडी के स्कूल और अस्पताल भी चौकीदारों की कमी से जूझ रहे हैं। एमसीडी के 1100 इमारतों में 1500 के करीब स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में भी चौकीदारों की भारी कमी है। स्कूल संचालित होते समय गार्ड नहीं होते हैं। जिसकी वजह से स्कूल के शिक्षक और अन्य कर्मचारी ही गेट खोलते हैं।

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