'अक्टूबर तक खत्म हो भलस्वा लैंडफिल पर कचरा', केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किया साइट का दौरा; दिया नया लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भलस्वा लैंडफिल साइट का दौरा कर लीगेसी कचरे के बायो माइनिंग और बायो रेमेडिएशन कार्यों की समीक्षा की।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किया भलस्वा लैंडफिल साइट का दौरा। जागरण
HighLights
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भलस्वा लैंडफिल का दौरा किया।
लीगेसी कचरे के बायो माइनिंग कार्यों की समीक्षा की गई।
दिसंबर तक कचरा निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित है।
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने बृहस्पतिवार को भलस्वा लैंडफिल साइट का निरीक्षण और वहां चल रहे लीगेसी कचरे के बायो माइनिंग एवं बायो रेमेडिएशन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर भलस्वा लैंडफिल साइट पर जमा कचरे के निस्तारण के लिए सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भलस्वा लैंडफिल साइट पहुंचे। यहां चल रहे बायोमाइनिंग एवं वेस्ट प्रोसेसिंग कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया।
बाद में उन्होंने कहा कि हमने इस लैंडफिल साइट को तय समयसीमा में पूर्णतः समाप्त करने का लक्ष्य रखा है और उसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है।
लीगेसी कचरे निस्तारण की प्रक्रिया तेज
भलस्वा लैंडफिल साइट के कूड़े के इस विशाल पहाड़ को समाप्त करने के लिए वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लीगेसी कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इसी साल दिसंबर माह तक कूडे़े के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर सिविल लाइंस जोन के अध्यक्ष गुलाब सिंह, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त संजीव खिरवार,सिविल लाइंस जोन के निगम उपायुक्त शशि प्रताप सिंह,प्रमुख अभियंता पीसी मीणा के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
अक्टूबर तक लैंडफिल को खत्म करने का दिया लक्ष्य
वैसे तो भलस्वा लैंडफिल को खत्म करने की समय-सीमा दिसंबर 2026 एमसीडी ने तय की हुई है, लेकिन मनोहर लाल ने इसे अक्टूबर तक खत्म करने का लक्ष्य एमसीडी को दिया है। उन्होंने नए कचरे को भी तय समय-सीमा में खत्म करने को कहा है।
हालांकि यह चुनौतीपूर्ण है क्योंकि जून-जुलाई में होने वाली मानसून की वर्षा में पुराने कचरे का निस्तारण मुश्किल हो जाता है। पूर्व के वर्षों में जहां प्रतिदिन 15-20 हजार टन प्रतिदिन कचरा निस्तारण होता था, वर्षा में चार-पांच हजार टन ही हो पाता है।
