दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों के साथ रैंगिंग का आरोप, प्रशासन ने शुरू की जांच
नई दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) में फर्स्ट ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा अपमानजनक व्यवहार ...और पढ़ें

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में रैंगिंग की शिकायत।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठत मौलाना आजाद मेडिकल कालेज (एमएएमसी) में फर्स्ट ईयर रेजिडेंट डाक्टरों के साथ अपमानजनक व्यवहार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप मुख्य रूप से ऑर्थोपेडिक्स विभाग से जुड़े हैं, जहां सीनियर रेजिडेंट्स पर जूनियर्स के साथ अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।
कॉलेज प्रशासन ने इस तरह के आरोप की पुष्टि तो की है पर, उसने इसे रैगिंग न होने का दावा करते हुए बताया है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एमएएमसी की डीन डॉ. मुनीषा अग्रवाल ने पूछे जाने पर बताया कि मामला उनके संज्ञान में है, लेकिन प्रथम दृष्टया इसे रैगिंग नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘पूरे मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।’
वहीं, आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. ललित मणि ने कहाकि ‘आरोप और शिकायत से ऐसा प्रतीत नहीं होता कि सीनियर रेजिडेंट्स रैगिंग कर रहे हैं, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि कोई दोषी पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
क्या हैं आरोप
- फर्स्ट ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों को ‘मुर्गा’ बनाकर अपमानित करने के आरोप
- छोटी गलतियों पर सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार और थप्पड़ मारने का आरोप
- घंटों खड़े रहने की सजा, जिससे शारीरिक दर्द की शिकायत
- सीनियर्स के लंच खर्च उठाने का आरोप
पीड़ित फर्स्ट ईयर रेजिडेंट डाक्टरों का कहना
प्रभावित फर्स्ट ईयर रेजिडेंट डाक्टर के अनुसार, इस तरह के व्यवहार से शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ रही है। लगातार दबाव के कारण ड्यूटी और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।
क्या कहते हैं नियम
- नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के एंटी-रैगिंग नियमों के तहत किसी भी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार प्रतिबंधित है।
- रेजिडेंट डाक्टरों के लिए साप्ताहिक कार्य घंटे सीमित रखने की सिफारिश
- पर्याप्त आराम और सुरक्षित कार्यस्थल अनिवार्य
- उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
सिस्टम की समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल शिक्षा में सीनियर-जूनियर के बीच सख्त हायरार्की और लंबे समय से चली आ रही कार्यसंस्कृति ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती है।
क्या होना चाहिए
- एंटी-रैगिंग कमेटी को सक्रिय किया जाए
- गुप्त शिकायत और हेल्पलाइन व्यवस्था मजबूत हो
- मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जाए
- दोषियों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई हो
यह मामला न केवल एक संस्थान, बल्कि पूरे मेडिकल शिक्षा तंत्र में सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।
