78 से 89 किलो वजन, सात्विक भोजन और 'जय सियाराम'; दिल्ली की लव-कुश रामलीला के लिए ऐसे 'हनुमान' बने पंकज कामत
अभिनेता पंकज कामत दिल्ली की लव-कुश रामलीला में हनुमान का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने इस भूमिका के लिए 11 ...और पढ़ें

लव-कुश रामलीला के 'हनुमान'
HighLights
पंकज कामत ने हनुमान के लिए 11 किलो वजन बढ़ाया
सात्विक भोजन, दो बार वर्कआउट और शांत स्वभाव अपनाया
फिल्मों में रामायण से छेड़छाड़ पर जताई कड़ी आपत्ति
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में मशहूर लव-कुश रामलीला का शानदार आगाज हो चुका है। इस खास मौके पर दैनिक जागरण ने रामलीला की टीम से खास बातचीत की। इस बातचीत में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे अभिनेता पंकज कामत, जो मंच पर संकटमोचन हनुमान जी का किरदार निभा रहे हैं।
पंकज ने अपने इस आध्यात्मिक सफर, शारीरिक बदलाव और फिल्मों में रामायण के साथ हो रही छेड़छाड़ पर खुलकर अपने विचार रखे।
बचपन का सपना हुआ पूरा, लेकिन चुनौती है बड़ी
पंकज कामत ने बताया कि हनुमान जी का किरदार निभाना उनके बचपन का सपना था। जब उन्हें यह रोल मिला, तो उन्हें लगा जैसे प्रभु श्री राम और हनुमान जी का सीधा आशीर्वाद मिल गया हो। हालांकि, यह किरदार उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण भी है। इस बार रामलीला में डायलॉग्स पोएट्री (काव्य) फॉर्म में हैं।
पंकज के मुताबिक, 'कैमरे के सामने टीवी शोज करना अलग है, लेकिन लाइव ऑडियंस के सामने बिना रीटेक के पौराणिक भाषा में काव्य संवाद बोलना एक बहुत ही मुश्किल काम है। लेकिन, मैं ये पूरी श्रद्धा से करूंगा।'
किरदार के लिए 11 किलो बढ़ाया वजन
पंकज ने हनुमान जी के बलशाली स्वरूप में ढलने के लिए खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह बदल लिया है। उन्होंने बताया कि, "जब मुझे यह रोल मिला, तब मेरा वजन 78 किलो था। अब मैंने इसे बढ़ाकर 89 किलो कर लिया है।"
पंकज अब दिन में दो बार वर्कआउट करते हैं और सात्विक भोजन लेते हैं। उन्होंने अपने गुस्से को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। वह हमेशा शांत और विनम्र रहते हैं और अगर कोई उन पर गुस्सा भी करता है, तो वह हाथ जोड़कर सिर्फ 'जय सियाराम' कहते हैं।
फिल्मों में रामायण से छेड़छाड़ पर छलका दर्द
हाल के दिनों में फिल्मों में भगवान के पहनावे और डायलॉग्स के साथ जो भद्दे प्रयोग हुए हैं, उस पर पंकज ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हनुमान जी के कपड़ों और स्वरूप को बदलना उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है।
वे सोशल मीडिया पर ऐसी चीजें सामने आते ही उसे हटा देते हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि हमारी संस्कृति और रामायण को खराब न किया जाए; जो ग्रंथ में जैसा लिखा है, उसे उसी पवित्रता के साथ पेश किया जाना चाहिए।
भक्ति से दूर होना लंकेश बनने जैसा
आज की पीढ़ी के भक्ति और धर्म से दूर होने के सवाल पर पंकज ने कहा कि यह बहुत गलत बात है। इंसान की शादी से लेकर उसकी मृत्यु तक, हर जगह भगवान का नाम लिया जाता है, फिर लोग भक्ति क्यों छोड़ रहे हैं?
हमें अपने धर्म और आराध्य की इज्जत करनी चाहिए क्योंकि यही हमें मर्यादा में रहना सिखाते हैं। पंकज ने स्पष्ट कहा, "जब हम भगवान को नहीं मानते और मर्यादा भूल जाते हैं, तो हमारा हाल लंकेश (रावण) जैसा हो जाता है।"
