लुटियंस दिल्ली में 1 नवंबर से पार्किंग महंगी, दोगुना लगेगा चार्ज; लेकिन EV वालों की बल्ले-बल्ले
लुटियंस दिल्ली में 1 नवंबर से सामान्य वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क दोगुना होगा, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों को 50% छूट ...और पढ़ें

एक नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना होने जा रहा है। फोटो: आर्काइव
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली में एक नवंबर से सामान्य वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क दोगुना हो जाएगा, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को 50 प्रतिशत छूट मिलती रहेगी।
दिल्ली सरकार के निर्देश पर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना के तहत यह निर्णय लिया है। परिषद का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और प्रदूषण कम करना है।
अभी तक एनडीएमसी इलाके में 151 पार्किंग स्थल चलते हैं, जहां पर एनडीएमसी सामान्य चार पहिया वाहन से 20 रुपये घंटा तो वहीं दो पहिया वाहनों से 10 रुपये घंटा पार्किंग का शुल्क लेता है। इसे एक नवंबर से दोगुना कर दिया जाएगा।
एक नवंबर से दोगुना होगा पार्किंग शुल्क
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि परिषद के पास फिलहाल 157 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन हैं। 31 दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 204 करने का लक्ष्य है।
परिषद के बेड़े में 32 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं, जबकि 28 वाहन किराये पर लिए गए हैं। चहल ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनडीएमसी क्षेत्र की 24 प्रमुख सड़कों पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
इसके तहत करीब 1,200 बिजली के खंभों को कवर किया जाएगा। लगभग 27 किलोमीटर सड़कों पर नवंबर के अंत तक यह व्यवस्था शुरू करने का लक्ष्य है।
फिलहाल मान सिंह रोड, शाहजहां रोड, भगवान दास रोड, तिलक मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग और डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग पर सिस्टम चालू हैं।
निर्माण स्थलों पर 115 एंटी स्मॉग गन
धूल नियंत्रण के लिए 12 मोबाइल एंटी स्मॉग गन तैनात की गई हैं। इसके अलावा 10 प्रमुख निजी बहुमंजिला इमारतों और एनडीएमसी की कुछ इमारतों पर भी एंटी स्मॉग गन लगाई गई हैं।
निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों पर 115 एंटी स्मॉग गन तैनात हैं। सड़कों की धुलाई के लिए तीन प्रेशर जेटिंग मशीनें और 18 पानी के टैंकर लगाए गए हैं। इनमें 10 टैंकर स्प्रिंकलर सिस्टम से युक्त हैं।
स्मार्ट सिंचाई से पेयजल बचाने की तैयारी
एनडीएमसी 11 स्थानों पर 19.61 किलोमीटर सड़कों के किनारे स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य हरित क्षेत्रों में शोधित पानी का इस्तेमाल बढ़ाना और पेयजल बचाना है।
परिषद के नौ विकेंद्रीकृत सीवेज शोधन संयंत्रों की संयुक्त क्षमता 2,900 किलोलीटर प्रतिदिन है। इसके अलावा पीपीपी के तहत आठ सीवेज शोधन संयंत्र और पांच एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव है।
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