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चांदनी चौक के प्रसिद्ध चाट पकौड़ी के स्वाद पर LPG किल्लत का ग्रहण, मेन्यू में कटौती कर रही फेमस दुकानें

Published: Sun, 15 Mar 2026 04:43 AM (IST)

पुरानी दिल्ली, खासकर चांदनी चौक, जामा मस्जिद और दरियागंज के प्रसिद्ध भोजनालय व्यावसायिक एलपीजी की किल्लत से जूझ रहे हैं। ...और पढ़ें

चंदानी चौक स्थित घंटेवाला की दुकान, जिसके मेन्यू से चाट हुआ गायब। जागरण

चंदानी चौक स्थित घंटेवाला की दुकान, जिसके मेन्यू से चाट हुआ गायब। जागरण

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नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। व्यावसायिक एलपीजी की किल्लत से चांदनी चौक स्थित सदी पुराने ऐतिहासिक चाट-नाश्ते की दुकानों का संचालन भी संकट में है। किसी तरह सिलिंडर का जुगाड़ कर खुलते इन चाट प्रेमियों के अहम ठिकानों के अगले दिन का ठिकाना नहीं है। फिलहाल ये खुल रहे हैं, पर किसी भी दिन इन पर ताला लटका मिल सकता है।

इनके प्रेमी न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर बल्कि बाकि राज्याें व विदेश से लोग है। वैसे, सिलिंडर संकट के बीच व्यंजनों व चाट-पकौड़े के समृद्ध संसार के मेन्यू में कटौती हो गई है। यहीं हाल मुगलई व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध जामा मस्जिद और दरियागंज के प्रसिद्ध रेस्तरां का है। जहां इस किल्लत में कोयला, लकड़ी, इंडक्शन तथा डीजल का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है।

इंडेक्शन का इस्तेमाल बढ़ा दिया 

चांदनी चौक मुख्य मार्ग स्थित 164 वर्ष पुरानी मिठाई व नाश्ते की दुकान घंटेवाला के संचालक ईंधन की किल्लत से काफी मुश्किलों से हो पा रहा है। दुकान के मालिक सुशांत जैन के अनुसार, उन्होंने बताया कि इंडेक्शन का इस्तेमाल बढ़ा दिया है, लेकिन उसे भी ज्यादा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि बिजली का लोड बढ़वाने के साथ पूरी वायरिंग बदलवानी होगी। इसलिए ऐसी स्थित में नाश्ते में आलू की चाट, ब्रेड पकौड़े, बेडमी पूरी के साथ मिठाईयों में कलाकंद व मिल्क मेक का निर्माण बंद कर दिया है, लेकिन दाम नहीं बढ़ाया है।

क्योंकि, इसमें अधिक एलपीजी खर्च होता है। उन्हाेंने बताया कि सड़क के दूसरी ओर पीएनजी लाइन है। वह आइजीएल से आग्रह करेंगे कि वह इस ओर भी कनेक्शन दें।

दरीबा स्थित प्रसिद्ध जलेबी वाले की दुकान पर स्वाद लेने दूर-दूर से लोग पहुंचे हुए हैं। इसके संचालक अभिषेक जैन के अनुसार, एक-एक सिलिंडर के जुगाड़ के लिए भटकना पड़ रहा है। कालाबाजारी में 4,000 रुपये तक में सिलिंडर मिल रही है।

उन्होंने कहा कि हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि दुकान खोले और ग्राहकों की सेवा करें। जलेबी वाले की जलेबी, रबड़ी और समोसे प्रसिद्ध है। वह कहते हैं लोग दूर-दूर से उम्मीद में स्वाद लेने आते हैं। ऐसे में हम उन्हें निराश नहीं कर सकते। इसलिए किसी सामान का दाम भी नहीं बढ़ाया है।

आज से नहीं मिलेगा नटराज के दही भल्ले का स्वाद

चाट प्रेमियों का एक और ठिकाना 80 वर्ष पुरानी नटराज की दुकान है, जो दही भल्ले और चाट के लिए सबकी जुबान पर चढ़ा हुआ है। नटराज के मालिक महेंदर शर्मा के अनुसार,एलपीजी का जो स्टाक है, वह आज भर का ही है। हो सकता है कि रविवार को काफी निराशा के साथ दुकान बंद करनी पड़े। उन्होंने कहा कि ईंधन का जुगाड़ कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।

पराठे वाली गली में केवल 25 प्रतिशत ही ले पा रहे स्वाद

चांदनी चौक की पराठे वाली गली पराठों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का स्वाद भी 100 वर्ष से भी अधिक पुराना है। दीवानों में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी समेत अन्य प्रसिद्ध लोगों का नाम आता है, लेकिन एलपीजी सिलिंडर की किल्लत ने इसके भी चूल्हे बुझाने शुरू कर दिए हैं।

पराठे की दुकान के संचालक मनीष शर्मा के अनुसार, पहले तीन चूल्हे जलते थे, अब एक ही चूल्हा जल रहा है। कालाबाजारी में 5,000 रुपये तक का सिलेंडर मिल रहा है। ऐसे में कैसे और कितने दिनों तक दुकान चला पाएंगे। बमुश्किल 25 प्रतिशत ही ग्राहकों की सेवा कर पा रहे हैं।

तवा चिकन, कढ़ाई चिकन व चिकन शाही हुआ गायब

बात केवल चांदनी चौक की ही नहीं, पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के प्रसिद्ध मुगलई रेस्तरां का स्वाद भी संकट में है। वर्ष 1948 से संचालित अल जवाहर रेस्तरां के संचालन में भी काफी दिक्कतें आ रही है। उसके संचालक अकरम ने बताया कि ईंधन के रूप में अब लकड़ी, कोयले का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। साथ ही अधिक ईंधन लगने वाले मुगलई व्यंजनों से तवा चिकन, आलू गोश्त, कढ़ाई चिकन व चिकन शाही को हटा दिया गया है।

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इसी तरह, दरियागंज स्थित जायका रेस्तरां के संचालक दानिश इकबाल ने बताया कि उन्होंने इंडेक्शन को विकल्प के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। जिसके लिए उन्हें एक लाख रुपये से अधिक का निवेश करना पड़ा। साथ ही उन व्यंजनों को मेन्यू से हटा दिया है, जिनको बनाने में अधिक समय लगता है।