20 साल से पहचान बदलकर रह रही थी उम्रकैद की कैदी, दिल्ली पुलिस ने हरिद्वार से पकड़ा; 2006 से थी फरार
हत्या और अपहरण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही एक महिला पैरोल पर छूटने के बाद 20 साल ...और पढ़ें
HighLights
महिला 2006 में पैरोल पर छूटने के बाद जेल नहीं लौटी
पहचान बदलकर हरिद्वार में पूजा नाम से रह रही थी
क्राइम ब्रांच ने 20 साल बाद उसे हरिद्वार से दबोचा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। हत्या और अपहरण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही महिला पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद 20 साल से अधिक समय तक फरार रही।
पहचान छिपाने के लिए उसने अपना नाम बदलकर पूजा रख लिया और हरिद्वार में नए नाम और पहचान के साथ रहने लगी। क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने उसे हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया।
साधना उर्फ पूजा को 10 वर्षीय बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी थी। वह 18 जनवरी 2006 को पैरोल खत्म होने के बाद जेल वापस नहीं लौटी थी।
मामला आदर्श नगर थाने में वर्ष 1990 में दर्ज एफआइआर से जुड़ा है। छह जनवरी 1990 को 10 वर्षीय बच्चा आजादपुर टी-प्वाइंट से लापता हुआ था। गवाहों जगदीश चंद और वासदेव ने साधना को बच्चे का हाथ पकड़कर शाम करीब 5:30 बजे जीटी रोड पार करते देखा था।
जांच के दौरान साधना और सह-आरोपित राज कुमार को जहांगीरपुरी से पकड़ा गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रहते थे, हालांकि उनका विवाह नहीं हुआ था। बच्चे के पिता बलवंत राम और उनके परिवार से पुराने विवाद के चलते दोनों के बीच रंजिश थी।
मामले की सुनवाई के दौरान साधना को बच्चे के साथ आखिरी बार देखे जाने और साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने का दोषी पाया गया। उसे आइपीसी की धारा 364, 302 और 120-बी के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिसे अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा।
पैरोल मिली तो वापस नहीं लौटी
साधना नौ जनवरी 1990 से केंद्रीय जेल में बंद थी। 27 दिसंबर 2005 को उसे पैरोल पर छोड़ा गया था। बाद में चिकित्सा आधार पर पैरोल तीन सप्ताह के लिए बढ़ाई गई। लेकिन 18 जनवरी 2006 को पैरोल खत्म होने के बाद उसने जेल में सरेंडर नहीं किया और फरार हो गई।
इसके बाद उसने अपनी पहचान बदल ली और साधना से पूजा बन गई। क्राइम ब्रांच के अनुसार, वह दो दशक से अधिक समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रही।
नोएडा से हरिद्वार तक बदली जिंदगी
पुलिस के अनुसार, पैरोल के दौरान वह राज कुमार के साथ रही थी। इसके बाद उसने नोएडा की एक निजी कंपनी में काम किया, जहां उसकी मुलाकात बढ़ई का काम करने वाले केशव से हुई। दोनों साथ रहने लगे।
बाद में दोनों मुकुंदपुर, दिल्ली चले गए और करीब पांच साल तक वहां रहे। इसके बाद वे हरिद्वार चले गए। पुलिस के मुताबिक, हरिद्वार में साधना ने केशव से मंदिर में शादी की और दस्तावेजों में भी उसकी पहचान केशव की पत्नी के रूप में इस्तेमाल की।
पुराने सुरागों से हरिद्वार तक पहुंची पुलिस
क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस टीम ने पुराने संपर्कों, पारिवारिक संबंधों और मानव स्रोतों से मिली जानकारियों के आधार पर कई सुरागों पर काम किया।
एएसआइ सुरेश गुप्ता को साधना के हरिद्वार में बदली हुई पहचान के साथ रहने की सूचना मिली। सूचना का गोपनीय तरीके से सत्यापन किया गया। पहचान की पुष्टि होने के बाद टीम ने हरिद्वार में निगरानी शुरू की और 27 सितंबर 2026 को साधना उर्फ पूजा को गिरफ्तार कर लिया।
