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राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद भ्रामक दवाओं के विज्ञापनों पर सख्ती, उपराज्यपाल सीधे लेंगे एक्शन

Published: Mon, 19 Jan 2026 09:12 PM (IST)

केंद्र सरकार ने केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपालों/प्रशासकों को चमत्कारी दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार दिया ...और पढ़ें

फाइल फोटो।

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नई दिल्ली, एएनआइ। केंद्रशासित प्रदेशों में गंभीर बीमारियों के शर्तिया इलाज या चमत्कारी गुणों वाली दवाओं के विज्ञापनों पर अब उपराज्यपाल या प्रशासक सीधे एक्शन ले सकेंगे। इसके तहत प्रशासक विज्ञापनों से जुड़े परिसरों की तलाशी लेने, दस्तावेज जब्त करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए सक्षम अधिकारियों को अधिकृत कर सकेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे झूठे और अवैज्ञानिक दावों के प्रसार पर अंकुश लगेगा और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर समेत पांच केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासकों और उपराज्यपालों को ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत राज्य सरकार की शक्तियों के प्रयोग का अधिकार सौंप दिया है।

अलगे आदेश तक रहेगा प्रभावी

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 239(1) के तहत राष्ट्रपति की स्वीकृति से लागू किया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।अधिसूचना में लक्षद्वीप, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के प्रशासकों को सक्षम प्राधिकारी घोषित किया गया है।

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इससे इन केंद्रशासित प्रदेशों में कानून के क्रियान्वयन, निगरानी और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ अभियोजन की जिम्मेदारी सीधे स्थानीय प्रशासन के पास आ जाएगी। क्या कहता है कानून, इसमें नया क्या है 1954 का यह कानून उन विज्ञापनों पर रोक लगाता है जो दवाओं या उपचारों को “चमत्कारी इलाज'' बताकर झूठे दावे करते हैं और जनता, विशेषकर कमजोर वर्गों को गुमराह करते हैं।

अब तक राज्यों में इसके प्रवर्तन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती थी, लेकिन केंद्रशासित प्रदेशों में प्रशासनिक ढांचे की भिन्नता के कारण अधिकारों को स्पष्ट करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

भ्रामक स्वास्थ्य विज्ञापनों पर लग सकेगी प्रभावी रोक अधिकारियों के मुताबिक यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। ¨प्रट, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मंचों पर भ्रामक स्वास्थ्य विज्ञापनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रभावी कार्रवाई जरूरी हो गई थी। नए प्रविधानों के तहत संबंधित प्रशासक विज्ञापनों की निगरानी, शिकायतों की जांच और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे, जबकि समग्र नियंत्रण राष्ट्रपति के अधीन रहेगा।

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