राज्य ब्यूरो,नई दिल्ली :

केजरीवाल सरकार और राजनिवास के बीच केवल विवादों का नाता ही बचा दिख रहा है। विवादों के इस सिलसिले में जो लगातार पिस रहा है वह दिल्ली का विकास है और भुगतने वाली जनता है। माना जा रहा है कि दिल्ली सरकार का रवैया ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में दिल्ली के हालात और खराब होंगे। सरकार हर मामले में उपराज्यपाल से लड़ती रहेगी और केंद्र को कोसती रहेगी तो दिल्ली को कुछ भी हाथ लगने वाला नहीं है। दिल्ली में विकास की गति लगभग ठप है।

डोर-स्टेप डिलीवरी सिस्टम यानी जनता के दरवाजे पर सुविधाएं पहुंचाए जाने की योजना को वापस भेजने के तीन दिन बाद भी दिल्ली सरकार शांत नहीं है। उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से योजना को वापस भेजने को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं। उनसे सरकार सहमत नहीं है और लगातार उपराज्यपाल के फैसले पर सवाल उठा रही है। जबकि उपराज्यपाल की ओर से योजना वापस किए जाने के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी दी जा चुकी है। जिसमें सभी पहलुओं पर विस्तार से बताया गया है कि ऑनलाइन हो रहीं सरकारी सुविधाओं आदि को देखते हुए इस तरह की योजना की अब जरूरत नहीं रह जाती है। बावजूद सरकार की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार कह चुकी है कि जब पिज्जा घर पर पहुंच सकता है तो सरकारी सविधाएं क्यों नहीं। इस पर उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह पिज्जा नहीं पॉलिसी है। यहां सुविधाओं को डाउनलोड कर उपलब्ध कराया जाएगा। जबकि पिज्जा डाउनलोड नहीें हो सकता। उधर दिल्ली सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पिज्जा की बात कह कर शुक्रवार को फिर तंज कसा। सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि ऑनलाइन डिलिवरी से पिज्जा डाउनलोड नहीं हो सकता, लेकिन एक जीवित इंसान को भी ऑनलाइन अपलोड करके सरकारी ऑफिस में नहीं पहुंचाया जा सकता।

मैंने एलजी साहब से अनुरोध किया है कि हम दोनों मुख्यमंत्री के साथ मिलकर जन-संपर्क वाले सरकारी दफ्तरों में, बिना पूर्व सूचना के एक साथ चलें और वहा लाइन में लगे लोगों से बात करें। उनकी समस्याओं को समझें। तब इस डोर-स्टेप डिलीवरी सिस्टम के प्रस्ताव पर फैसला करेंगे।

Posted By: Jagran

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