रघु राय नहीं रहे: पद्मश्री फोटोजर्नलिस्ट, जिनकी तस्वीरों में बसा था भारत का इतिहास
आजाद भारत के इतिहास को अपनी तस्वीरों में कैद करने वाले मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 83 वर्ष की ...और पढ़ें

फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का निधन। फाइल फोटो
HighLights
मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन।
उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की तस्वीरें खींचीं।
पद्मश्री और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
मुहम्मद रईस, नई दिल्ली। आजाद भारत का आधा इतिहास तस्वीरों में दर्ज करने वाले की जिंदगी का फ्रेम रविवार को खाली हो गया। भोपाल गैस त्रासदी की चीख, मदर टेरेसा की ममता और इंदिरा गांधी का रौब- सबको अपनी तस्वीरों में जिंदा रखने वाले फोटोजर्नलिस्ट रघु राय नहीं रहे।
दो साल से कैंसर से जूझने के बाद 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने रविवार को दुनिया को अलविदा कह दिया।
वर्ष 1972 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की प्रभावशाली तस्वीरों के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 2017 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा था। उनके पार्थिव शरीर का स्वजनों और दोस्तों की मौजूदगी में लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में अंतिम संस्कार हुआ।
दो साल पहले प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था
रघु राय के परिवार में पत्नी गुरमीत, बेटे नितिन और बेटियां लगन, अवनी और पुरवई हैं। रघु राय की तस्वीरें भारत के आत्मा को दिखाती हैं। बेटे नितिन ने बताया कि दो साल पहले उनके पिता को प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था।
इलाज के बाद वह इससे उबर गए थे, पर बाद में कैंसर पेट तक फैल गया। हाल ही में बीमारी मस्तिष्क तक पहुंच गई थी। इसके साथ ही उम्र संबंधी परेशानियां भी बढ़ गई थीं। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
आधुनिक भारत का विजुअल दस्तावेज है रघु राय की फोटोग्राफीदक्षिणी दिल्ली के महरौली के रहने वाले रघु राय की फोटोग्राफी को आधुनिक भारत का विजुअल दस्तावेज कहा जाता है। विश्व इतिहास की सबसे भयावह औद्योगिक आपदाओं में से एक भोपाल गैस त्रासदी और उसके बाद कई प्रभावशाली तस्वीरें खींचीं।
तीन दिसंबर 1984 की सुबह, यूनियन कार्बाइड प्लांट से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक होने की दुर्घटना के बाद उन्होंने भोपाल में तबाही का दर्दनाक मंजर तस्वीरों में कैद किया। इनमें एक अज्ञात मृत बच्चे की तस्वीर ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।
1965 में द स्टेट्समैन से की थी करियर की शुरुआतरघु राय का जन्म 18 दिसंबर 1942 को झंग में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। उन्होंने 1965 में दिल्ली में अखबार द स्टेट्समैन से स्टाफ फोटोग्राफर के रूप में जुड़े।
1976 में उन्होंने अखबार की नौकरी छोड़ स्वतंत्र फोटोग्राफर के तौर पर काम शुरू किया। वर्ष 1982 से 1992 तक वह इंडिया टुडे में डायरेक्टर आफ फोटोग्राफी रहे। इसके अलावा 1990 से 1997 के बीच वह वर्ल्ड प्रेस फोटो की जूरी के सदस्य भी रहे।
1992 में फोटोग्राफर आफ द ईयर चुना गया
अमेरिका में चुने गए फोटोग्राफर आफ द ईयर रघु राय को मशहूर फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों का मार्गदर्शन मिला। ब्रेसों उनके काम से इतने प्रभावित हुए कि 1977 में उन्होंने राय को मैग्नम फोटोज से जुड़ने की सिफारिश की।
वर्ष 1992 में अमेरिका में उन्हें फोटोग्राफर आफ द ईयर चुना गया। वहीं, 2019 में उन्हें अकादेमी दे बो-आर्ट्स फोटोग्राफी अवार्ड मिला।
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