IARC का दावा: 17 देशों के 23 एक्सपर्ट्स की स्टडी में खुलासा, लो-डोज सीटी स्कैन से घटेगी फेफड़ों के कैंसर से मौतें
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की रिपोर्ट के अनुसार, लो-डोज सीटी स्कैन (एलडीसीटी) फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में प्रभावी है।
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2024 में करीब 19 लाख लोगों की मौत हुई। AI जनरेटेड
HighLights
एलडीसीटी फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर कम करने में प्रभावी।
उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में शुरुआती पहचान संभव बनाता है।
50-80 वर्ष के धूम्रपान करने वालों के लिए विशेष उपयोगी है।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है। वर्ष 2024 में इस बीमारी से करीब 19 लाख लोगों की मौत हुई।
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) की नई रिपोर्ट के अनुसार, जिन्हें फेफड़ों के कैंसर का ज्यादा खतरा है, उनमें लो-डोज सीटी स्कैन (एलडीसीटी) से फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती अवस्था में ही सटीक पहचान हो सकती है।
इससे समय पर उपचार मिलने पर फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। रिपोर्ट 24 सितंबर को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (एनईजेएम) में प्रकाशित हुई।
खांसी में खून या सीने में दर्द जैसे लक्षण
एम्स के कैंसर विशेषज्ञ प्रो. डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, एलडीसीटी से फेफड़ों के कैंसर की पहचान आरंभिक चरण में हो सकती है। बीमारी के शुरुआती दौर में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं। खांसी में खून आना या सीने में दर्द जैसे लक्षण सामने आने तक कैंसर काफी बढ़ चुका होता है।
एलडीसीटी पांच से छह मिलीमीटर तक की छोटी गांठों का भी पता लगा सकता है, जो साधारण एक्स-रे में नजर नहीं आती हैं।
48 अध्ययनों की समीक्षा
आईएआरसी के 17 देशों के 23 विशेषज्ञों ने फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग से जुड़े 48 अध्ययनों की समीक्षा की। इसमें जिन्हें फेफड़ों के कैंसर का ज्यादा खतरा है, उनमें एलडीसीटी से स्क्रीनिंग करने पर फेफड़ों के कैंसर से मृत्यु दर और एडवांस स्टेज के कैंसर के मामलों में कमी के प्रमाण मिले। वहीं, छाती के साधारण एक्स-रे से मृत्यु दर कम होने का ठोस प्रमाण नहीं मिला।
अमेरिका के नेशनल लंग स्क्रीनिंग ट्रायल (एनएलएसटी) में एलडीसीटी से मृत्यु दर में 20 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। यूरोप के नेल्सन ट्रायल में पुरुषों में यह कमी 24 प्रतिशत रही। चीन और जापान के अध्ययनों में भी एलडीसीटी से मृत्यु दर में कमी के प्रमाण मिले।
जिन्हें ज्यादा खतरा, उनके लिए
प्रो. डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, एलडीसीटी सभी लोगों के लिए नहीं है। मुख्य रूप से 50 से 80 वर्ष के ऐसे लोगों में इसकी उपयोगिता है, जिन्हें धूम्रपान का पर्याप्त इतिहास रहा हो और जो वर्तमान में धूम्रपान करते हों या हाल के वर्षों में इसे छोड़ चुके हों।
रिपोर्ट में फाल्स पाजिटिव और ओवर-डायग्नोसिस का खतरा भी बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीनिंग के साथ धूम्रपान छोड़ने की काउंसलिंग और तंबाकू नियंत्रण भी जरूरी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इमेज रीडिंग भी स्क्रीनिंग को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
