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123 सालों से बंद था कोणार्क मंदिर का महामंडप, जानिए ASI क्यों हटाने जा रहा है इसके अंदर भरी बालू

Published: Fri, 09 Oct 2026 02:22 PM (GMT+05:30)

कोणार्क सूर्य मंदिर का 40 मीटर ऊंचा महामंडप 123 साल बाद अपने मूल स्वरूप में लौटेगा, जिसके लिए 1903 में ...और पढ़ें

ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर

ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर

HighLights

  1. महामंडप से 123 साल बाद बालू हटाने का काम शुरू

  2. विशेषज्ञों की सिफारिश पर बालू चरणबद्ध तरीके से हटेगी

  3. पर्यटकों को महामंडप के अंदर जाने का अवसर मिलेगा

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। ओडिशा स्थित विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का 40 मीटर ऊंचा पिरामिडनुमा महामंडप करीब 123 साल बाद अपने मूल स्वरूप में लौटने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वर्ष 1903 में संरचना की सुरक्षा के लिए महामंडप के भीतर 19.8 मीटर तक भरी गई बालू के बाद से महामंडप के अंदरूनी हिस्से में पर्यटकों का प्रवेश बंद है। बालू हटने और संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को इस ऐतिहासिक संरचना को नजदीक से देखने का अवसर मिल सकेगा।

1984 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हुआ यह मंदिर भारत के शीर्ष 5 सबसे अधिक देखे जाने वाले स्मारकों में से एक है। मुख्य सूर्य मंदिर (गर्भगृह) की मुख्य प्रतिमा अब वहां मौजूद नहीं है। कहा जाता है कि सूर्यदेव की मूल प्रतिमा गर्भगृह में हवा में तैरती थी, जिसे बाद में हटा दिया गया या मंदिर के क्षतिग्रस्त होने के बाद सूर्य की प्रतिमा को पुरी के जगन्नाथ मंदिर ले जाया गया।

कमेटी ने दिए हैं ये सुझाव

महामंडप से बालू निकालने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि विशेषज्ञों के तकनीकी अध्ययन के आधार पर लिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने इसकी संरचनात्मक मजबूती, भार सहने की क्षमता और बालू हटाने से होने वाले संभावित प्रभावों का आकलन कराया है।

एएसआइ के महानिदेशक डा वाइ एस रावत ने कहा कि समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट पर बालू हटाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की सिफारिश है कि बालू एक साथ निकालने के बजाय चरणबद्ध तरीके से हटाई जाए, ताकि सदियों पुरानी संरचना पर अचानक दबाव न पड़े।

इसलिए भरनी पड़ी थी महामंडप में बालू

लगातार आ रहे तूफान के चलते महामंडप में बालू भरने का निर्देश बंगाल के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर जे. ए. बॉर्डिलन ने 1903 में दिया था। ब्रिटिश अधिकारियों को आशंका थी कि कमजोर हो चुकी संरचना का ऊपरी हिस्सा ढह सकता है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम के शासनकाल में कराया गया था।

मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और विशाल पत्थर की संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है। 1903 में ब्रिटिश शासन के दौरान इसके अंदर बालू भर दी गई थी। इसका उद्देश्य कमजोर होती संरचना को सहारा देना और उसके ढहने की आशंका कम करना था। बालू भरने से महामंडप के भीतर का बड़ा हिस्सा ढक गया और आम लोगों के लिए वहां प्रवेश बंद हो गया।

इस समिति ने दी बालू हटाने की सिफारिश

महामंडप से बालू हटाने की प्रक्रिया पर पिछले 12 साल से बात हो रही थी। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर 2020 में सक्रियता से पहल हुई। फरवरी 2020 में कोणार्क सूर्य मंदिर के संरक्षण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को बालू हटाने की सुरक्षित प्रक्रिया पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद एएसआइ ने विशेषज्ञों की चार सदस्यीय समिति गठित की। इसमें संरचनात्मक अभियांत्रिकी के विशेषज्ञों, जिनमें आइआइटी मद्रास के प्रोफेसर अरुण मेनन भी शामिल थे। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की ने भी संरचना की मजबूती से जुड़े अध्ययन में योगदान दिया।

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