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क्या है दिल्ली शराब घोटाला केस, जिससे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए बरी?

Published: Fri, 27 Feb 2026 11:54 AM (IST)

दिल्ली आबकारी नीति मामले में 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ...और पढ़ें

आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के सीबीआई मामले से अरविंद केजरीवाल और मरीज सिसोदिया बरी। फोटो: आर्काइव

आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के सीबीआई मामले से अरविंद केजरीवाल और मरीज सिसोदिया बरी। फोटो: आर्काइव

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की 2021–22 आबकारी नीति (शराब नीति) को लेकर 2022 से एक बड़ा विवाद, जांच और मुकदमा चल रहा था।

शुक्रवार यानी 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

अदालत ने कहा कि CBI ने ठोस सबूत पेश नहीं किए और केवल आरोपों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। नीचे समझते कि यह पूरा मामला क्या है, कैसे शुरू हुआ और आज क्या फैसला हुआ है?

क्या थी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22

दिल्ली सरकार ने चोरी को रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए नवंबर 2021 में अपनी आबकारी नीति में सुधार का प्रयास शुरू किया था। इस समय तक दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों और निजी कंपनियों के बीच समान रूप से वितरित की जाती थी और आबकारी विभाग प्रति वर्ष लगभग 4,500 करोड़ रुपये कमाता था।

दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के आने के बाद, सरकार ने खुदरा का पूरी तरह से निजीकरण कर, आबकारी चोरी और अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाकर 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा गया। इस नई नीति के तहत शहर के सभी 272 नगरपालिका वार्डों में कम से कम दो शराब की दुकानें होनी थीं।

क्या था मामला?

सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया है कि आबकारी नीति को संशोधित करते समय अनियमितता की गई थी और लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ दिया गया था। लाइसेंस शुल्क माफ या कम किया गया था और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना एल-1 लाइसेंस बढ़ाया गया था।

लाभार्थियों ने आरोपित अधिकारियों को अवैध लाभ दिया और पता लगाने से बचने के लिए अपने खाते की पुस्तकों में गलत प्रविष्टियां कीं। यह भी आरोप है कि आबकारी विभाग ने निर्धारित नियमों के विरुद्ध एक सफल निविदाकर्ता को लगभग 30 करोड़ रुपये की बयाना जमा राशि वापस करने का निर्णय लिया था।

कोरोना महामारी के कारण 28 दिसंबर 2021 से 27 जनवरी 2022 तक निविदा लाइसेंस शुल्क पर छूट की अनुमति दी गई थी। इससे सरकारी खजाने को 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। दिल्ली के उपराज्यपाल की सिफारिश पर सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआइ की प्राथमिकी पर ईडी ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी।

यह मामला कैसे शुरू हुआ?

2021–22 आबकारी नीति

  • 17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की, जिसमें शराब व्यापार को का निजीकरण करने का रास्ता चुना गया।
  • तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार का उद्देश्य था कि शराब बिक्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जाए और राजस्व बढ़े, लेकिन नीति का ढांचा और नियम विवादित रहे।

नीति को लेकर उठे सवाल और जांच के संकेत

8 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव ने रिपोर्ट दी कि जिसके कहा गया कि नई आबकारी नीति में गंभीर अनियमितताएं हुईं और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है।

जांच कब शुरू हुई?

  • 22 जुलाई 2022 को उपराज्यपाल ने इस मामले की CBI जांच की सिफारिश की।
  • 31 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने यह नीति रद्द कर दी और पुरानी नीति फिर लागू की गई।
  • 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने  FIR दर्ज कर की।

आरोप था कि नीति से गैर-बाजारयोग्य निजी व्यापारियों ('साउथ लॉबी') को अनुचित लाभ हुआ और इसके बदले आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं को लगभग 100 करोड़ की रिश्वत मिली।

गिरफ्तारी, जांच और कोर्ट लड़ाई

इस मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चली:

2023

  • 26 फरवरी 2023: सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया।
  • 9 मार्च 2023: ED ने सिसोदिया को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में भी गिरफ्तार किया।

2024

  • 21 मार्च 2024: ED ने अरविंद केजरीवाल को भी उनकी दिल्ली रिहायश से गिरफ्तार किया (मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों के सिलसिले में)।
  • 10 मई 2024: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी।
  • 13 सितंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में भी उन्हें जमानत दे दी।

27 फरवरी 2026 को कोर्ट ने क्या कहा

राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक बड़ा निर्णय सुनाया:

  • अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया
  • अदालत ने कहा कि CBI ने ठोस सबूत या आपराधिक साजिश साबित नहीं की। केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चल सकता।
  • विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया, इसलिए अब मामला आगे नहीं बढ़ेगा।
कब और क्या हुआ?
 
तारीख घटनाक्रम
22 जुलाई 2022 उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena ने नई आबकारी नीति (2021-22) के क्रियान्वयन में नियम उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए CBI जांच की सिफारिश की।
17 अगस्त 2022 Central Bureau of Investigation (CBI) ने धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप में तत्कालीन आबकारी मंत्री Manish Sisodia, विभागीय अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
19 अगस्त 2022 CBI ने सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के तीन अन्य सदस्यों के आवास पर छापेमारी की। दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर भी तलाशी ली गई।
30 अगस्त 2022 CBI की टीम ने गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित PNB शाखा में पहुंचकर सिसोदिया के बैंक लॉकरों की तलाशी ली।
27 सितंबर 2022 CBI ने आप के मीडिया प्रभारी Vijay Nair को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी ने उन्हें कथित साजिशकर्ताओं में शामिल बताया।
10 अक्टूबर 2022 हैदराबाद के कारोबारी Abhishek Boinpally को गिरफ्तार किया गया। उन पर दक्षिण भारत के कुछ शराब कारोबारियों के लिए पैरवी करने का आरोप लगा।
17 अक्टूबर 2022 CBI ने मनीष सिसोदिया से दिल्ली आबकारी नीति मामले में लगभग नौ घंटे तक पूछताछ की।
25 नवंबर 2022 CBI ने दिल्ली आबकारी मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें विजय नायर और अभिषेक बोइनपल्ली समेत सात अभियुक्तों को नामजद किया गया, हालांकि मनीष सिसोदिया को इस चार्जशीट में आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया गया।

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