JNU में रफ्तार बनी वन्यजीवों के लिए खतरा, एक हफ्ते में तीन की मौत
जेएनयू परिसर में तेज रफ्तार वाहनों के कारण वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी है। पिछले एक सप्ताह में दो ...और पढ़ें

जेएनयू कैंपस में रफ्तार का कहर: एक हफ्ते में तीन वन्यजीवों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
एक हफ्ते में जेएनयू में तीन वन्यजीवों की मौत हुई।
तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर से हुई इन मौतों की पुष्टि।
एनिमल वेलफेयर सोसाइटी ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जेएनयू का हरा-भरा परिसर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक ठिकाना माना जाता है, लेकिन अब कैंपस की सड़कों पर दौड़ते वाहन इनके लिए खतरा बन रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में दो पार्क्यूपाइन (सेह) और एक गोल्डन जैकाल (सियार) की मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक तौर पर तीनों मौतों की वजह वाहनों की टक्कर बताई जा रही है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।
जेएनयू से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तीनों घटनाएं रात के समय हुईं। परिसर में जगह-जगह स्पीड ब्रेकर होने के बावजूद कुछ वाहन चालक तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं। सूत्रों का कहना है कि बसों की गति भी कई स्थानों पर अधिक रहती है। रात में सक्रिय रहने वाले वन्यजीव अचानक सड़क पर आ जाने के कारण हादसे का शिकार हो रहे हैं।
जेएनयू में बड़ी संख्या में वन्यजीवों का बसेरा
जेएनयू परिसर में करीब 100 से 150 पार्क्यूपाइन होने का अनुमान है। कांटेदार शरीर वाला यह जीव खतरा महसूस होने पर अपने कांटे खड़े कर लेता है। इसे स्थानीय तौर पर सेह भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से रात में अपने बिल से बाहर निकलता है। सेंट्रल लाइब्रेरी, पूर्वांचल और ब्रह्मपुत्र हास्टल के आसपास इसकी मौजूदगी अधिक देखी जाती है।
वहीं, कैंपस में करीब 300 सियार होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में लगातार हो रही वन्यजीवों की मौत ने कैंपस की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनिमल वेलफेयर सोसाइटी ने भी तीन वन्यजीवों की मौत की पुष्टि
जेएनयू की एनिमल वेलफेयर सोसाइटी ने भी तीन वन्यजीवों की मौत की पुष्टि की है। सोसाइटी ने सुरक्षा विभाग को परिसर में निगरानी बढ़ाने और वाहनों की गति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
