VC के इस्तीफे से लेकर 'रोहित एक्ट' लागू करने तक, JNU में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की क्या हैं मांगे?
जेएनयू में छात्र UGC और कुलपति के बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मुख्य मांगों में ...और पढ़ें
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यूजीसी लागू करने को लेकर जेएनयू के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। फोटो: आर्काइव

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Jawaharlal Nehru University (JNU) में पिछले कुछ दिनों से UGC को लेकर छात्र संगठनों का विरोध-प्रदर्शन जारी है।
JNUSU विश्वविद्यालय की कुलपति Shantishree Dhulipudi Pandit के एक बयान को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। साथ ही, कैंपस में कथित जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए ‘रोहित एक्ट’ लागू करने की मांग भी तेज हो गई है। बृहस्तिवार को प्रदर्शन के बाद छात्रसंघ अध्यक्ष समेत 14 छात्रों गिरफ्तार कर लिया गया है।
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छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
JNUSU और वामपंथी छात्र संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख रखा है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:-
- कुलपति का इस्तीफा: छात्रों का आरोप है कि वीसी के बयान से दलित और वंचित वर्ग के छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि ऐसे बयान देने वाले व्यक्ति को प्रशासनिक कमेटियों में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
- ‘रोहित एक्ट’ लागू किया जाए: कैंपस में जातिगत भेदभाव की शिकायतों के निपटारे के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र तंत्र बनाने की मांग।
- यूजीसी के नए नियमों लागू हों: छात्र संगठनों का कहना है कि यूजीसी के नियम लागू हों और पर्याप्त चर्चा के साथ इन्हें और पुख्ता बनाया जाए, कोई खामी न हो।
- निलंबन/रस्टिकेशन वापस लेने की मांग: प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की अपील।
‘रोहित एक्ट’ क्या है?
‘रोहित एक्ट’ की मांग की पृष्ठभूमि Rohith Vemula की 2016 में हुई मृत्यु से जुड़ी है। इसके बाद देशभर के विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव को लेकर बहस तेज हुई थी।
छात्रों के अनुसार, आरक्षण के जरिए कैंपस में दाखिला पाने वाले छात्रों के साथ अंदरूनी स्तर पर भेदभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। ‘रोहित एक्ट’ का उद्देश्य ऐसे मामलों से निपटने के लिए:-
- कैंपस के भीतर स्वतंत्र एंटी-डिस्क्रिमिनेशन मैकेनिज्म बनाना
- शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच
- दोषी पाए जाने पर स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान
- पीड़ित छात्रों के लिए सुरक्षा और काउंसलिंग व्यवस्था
बताया जाता है कि इस एक्ट का एक ड्राफ्ट तैयार कर विभिन्न स्तरों पर चर्चा भी हुई थी, और कुछ राज्यों में इसे लेकर अभियान चलाए गए थे।

सरकार और यूजीसी की भूमिका
छात्र नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामों और यूजीसी दिशा-निर्देशों में कैंपस में जातिगत भेदभाव की समस्या को स्वीकार किया है। हालांकि, उनका आरोप है कि बनाए गए नियम पर्याप्त और प्रभावी नहीं हैं।
JNUSU ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, प्रदर्शन जारी रहेगा। उधर, कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
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