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JNU में विरोध-प्रदर्शनों से पढ़ाई बाधित, छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी बेचैनी

Published: Fri, 27 Feb 2026 05:19 PM (IST)

JNU में विरोध-प्रदर्शनों के कारण शैक्षणिक माहौल बिगड़ रहा है। छात्र आरोप लगाते हैं कि उन्हें प्रदर्शनों में शामिल होने ...और पढ़ें

JNU में विरोध-प्रदर्शनों के कारण शैक्षणिक माहौल बिगड़ रहा है। जागरण

JNU में विरोध-प्रदर्शनों के कारण शैक्षणिक माहौल बिगड़ रहा है। जागरण

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) का माहौल इन दिनों पढ़ाई पर फोकस करने वाले स्टूडेंट्स के लिए ठीक नहीं लग रहा है। कई स्टूडेंट्स का आरोप है कि कैंपस में चल रहे प्रोटेस्ट और पॉलिटिकल एक्टिविटीज़ से एकेडमिक माहौल खराब हो रहा है। उनका कहना है कि जो लोग स्टूडेंट पॉलिटिक्स से दूर रहकर सिर्फ एकेडमिक कामों पर फोकस करना चाहते हैं, उन्हें भी दबाव और डर के मारे क्लास में आना पड़ रहा है।

सोशल साइंसेज में PhD करने वाले एक स्टूडेंट ने बताया कि अगर वे प्रोटेस्ट में शामिल नहीं हुए तो उन्हें धमकाया जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है कि अगर वे अभी शामिल नहीं हुए तो बाद में उन्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे।

कैंपस के अंदर और बाहर के माहौल में साफ फर्क

फॉरेन लैंग्वेज डिपार्टमेंट की एक स्टूडेंट ने कहा कि कैंपस के अंदर और बाहर के माहौल में साफ फर्क है। उसका कहना है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसते ही उन्हें पढ़ाई से ज्यादा प्रोटेस्ट और नारे सुनने को मिलते हैं, जिससे रेगुलर क्लास में दिक्कत आ रही है। डर बढ़ गया है, खासकर फर्स्ट ईयर के BA स्टूडेंट्स में।

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MA पॉलिटिकल साइंस की एक स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि कुछ स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन नेशनल मुद्दों के बजाय फिलिस्तीन, पाकिस्तान और इराक जैसे इंटरनेशनल मुद्दों पर ज्यादा एक्टिव दिखते हैं। उन्होंने कहा कि इन एक्टिविटीज़ से एकेडमिक माहौल पर असर पड़ रहा है।

स्टूडेंट्स ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज और स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में हाल ही में हुए लॉकडाउन को भी चिंता की बात बताया। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के एक स्टूडेंट ने दावा किया कि अगर पुलिस और सिक्योरिटी वाले मंगलवार को समय पर नहीं पहुंचते, तो हालात बिगड़ सकते थे।

कुछ स्टूडेंट्स ने यह भी आरोप लगाया कि कैंपस के अंदर सिक्योरिटी कमजोर होती दिख रही है, और चल रही एक्टिविटीज़ से पेरेंट्स में चिंता बढ़ रही है। उनका कहना है कि हॉस्टल में भी इनसिक्योरिटी की भावना महसूस हो रही है। कैंपस के बाहर हुए प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए, स्टूडेंट्स ने जंतर-मंतर और इंडिया गेट जैसी जगहों पर नारेबाजी और पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी की भी आलोचना की।

लेफ्टिस्ट स्टूडेंट्स की पुलिस से झड़प

गुरुवार को मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन तक मार्च के दौरान, पुलिस अधिकारियों ने स्टूडेंट्स से अपील की और मेन गेट पर ताला लगा दिया। लेकिन, स्टूडेंट्स ने गेट का ताला तोड़ दिया और 400 से 500 स्टूडेंट्स ने बाहर निकलने की कोशिश की। पुलिस और स्टूडेंट्स के बीच झड़प हो गई। स्टूडेंट्स ने पुलिस अधिकारियों पर हमला किया, और जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने 14 लेफ्ट-विंग स्टूडेंट्स को हिरासत में ले लिया।

लेफ्ट-विंग प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स की क्या मांगें?

लेफ्ट विंग स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन और JNU स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े प्रोटेस्टर UGC रेगुलेशन लागू करने और वाइस चांसलर शांतिश्री डी. पंडित के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वे रोहित एक्ट लागू करने और स्टूडेंट यूनियन के अधिकारियों: प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट गोपिका, जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश और पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार को निकालने के फैसले को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं। लाइब्रेरी में तोड़फोड़ के मामले में दोषी पाए जाने के बाद इन अधिकारियों पर एक्शन लिया गया था।

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