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निष्कासन रद होने पर JNU के छात्रों ने तोड़ी भूख हड़ताल, हॉस्टल और स्कॉलरशिप पर भी बनी बात

Published: Tue, 20 Oct 2026 11:37 PM (IST)

जेएनयू छात्रसंघ ने 17 दिन से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, क्योंकि प्रशासन छात्र पदाधिकारियों का निष्कासन ...और पढ़ें

जेएनयू में छात्रों ने तोड़ी भूखहड़ताल। फोटो: आर्काइव

जेएनयू में छात्रों ने तोड़ी भूखहड़ताल। फोटो: आर्काइव

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन के छात्र पदाधिकारियों का निष्कासन रद करने और प्राथमिकी वापस लेने पर सहमत होने के बाद छात्रसंघ ने 17 दिन से जारी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है।

प्रशासन ने प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने समेत 14 अन्य मांगों पर सहमति जताई है। पांच छात्रसंघ पदाधिकारियों का निष्कासन भी तत्काल प्रभाव से रद कर दिया गया है। छात्रसंघ ने इसे छात्रों की एकजुटता की जीत बताया है। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि मांगों पर अमल होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

एक अक्टूबर 2026 को हुई विश्वविद्यालय आम सभा की बैठक के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई थी। आंदोलन के दौरान छात्रसंघ ने छात्र प्रतिनिधियों के निष्कासन, विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई, छात्रावासों की सुविधाओं और दाखिला प्रक्रिया समेत कई मुद्दे उठाए थे।

17 दिन बाद खत्म हुई भूख हड़ताल

JNUSU के अनुसार, प्रशासन ने छात्रसंघ पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष के निष्कासन को रद करने व छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने पर सहमति दी है।

इसके अलावा, निष्कासन, यूजीसी नियमों और छात्रावासों की सुविधाओं से जुड़े प्रदर्शनों के संबंध में शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने का भी आश्वासन दिया गया है।

छात्रसंघ ने कहा कि सीपीओ (चीफ प्राॅक्टर कार्यालय) मैनुअल के विवादित प्रावधानों की समीक्षा के लिए समिति बनाई जाएगी, जिसमें छात्रसंघ का एक पदाधिकारी शामिल होगा।

दाखिला प्रक्रिया में JNU प्रवेश परीक्षा (JNUEE) को लेकर उठाई गई मांग पर भी छात्र प्रतिनिधि की भागीदारी वाली समिति गठित करने पर सहमति बनी है।

छात्रावासों और सुविधाओं पर भी आश्वासन

छात्रसंघ के मुताबिक, सिद्धांत फाउंडेशन के पाठ्यक्रमों को बंद करने के प्रस्ताव पर समिति सक्षम प्राधिकारी को अनुकूल सिफारिश देगी। समान अवसर कार्यालय (ईओसी) की ऑडिट रिपोर्ट एक सप्ताह में उपलब्ध कराने और छात्रसंघ से परामर्श कर इसके पुनर्गठन पर भी सहमति बनी है। छात्रावास आवंटन में आरक्षण से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए भी समिति बनाई जाएगी।

प्रशासन ने मेरिट-कम-मीन्स (एमसीएम) छात्रवृत्ति में 25 फीसदी बढ़ोतरी पर विचार करने की सहमति दी है। ताप्ती और माही-मांडवी छात्रावासों के साथ ट्रांसजेंडर एवं जेंडर इक्वैलिटी फैसिलिटेशन एरिया का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा, जिसके बाद मरम्मत कार्य होगा।

सभी छात्रावासों में दो सप्ताह के भीतर गीजर चालू करने, टेफलाॅस का संरचनात्मक ऑडिट कराने और सीएसएलजी कैंटीन दोबारा खोलने का आश्वासन दिया है।

स्कूलों के पुस्तकालय रात नौ बजे तक खुले रखने तथा बराक छात्रावास में मेस शुरू करने और वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए समिति बनाने की बात भी कही गई है।

JNUSU के अनुसार, मांगों पर हुई प्रगति की समीक्षा और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर चर्चा के लिए दो सप्ताह बाद फिर बैठक होगी। छात्रसंघ ने कहा कि वह सभी आश्वासनों पर अमल की निगरानी करेगा।

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