जामिया मिल्लिया में बढ़ा तनाव, छात्रों ने खुद को पॉलीटेक्निक में किया बंद; कुलगुरु आवास की सुरक्षा बढ़ी
जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर भूख हड़ताल जारी है। पुलिस ने धारा 163 लगाई और समर्थकों को ...और पढ़ें

मिया मिल्लिया इस्लामिया के गेट नंबर-7 के बाहर बीएनएस की धारा 163 को लेकर लगा बैनर व साथ में खड़े पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान। जागरण
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। छात्रसंघ की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र एबिन व मोहम्मद रेहान को सोमवार रात जामिया प्रशासन ने धरनास्थल खाली करने का नोटिस दिया तो वहीं मंगलवार को पुलिस ने परिसर के आसपास नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लगा दी है।
छात्रों के समर्थन में पहुंचने वाले 15 से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। ऐसे में पुलिस की ओर से जबरन उठाए जाने की आशंका के बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने खुद को पालिटेक्निक भवन में बंद कर लिया।
बाकी छात्र भी दिनभर धरनास्थल से दूर ही रहे। दोपहर बाद ओखला हेड से छात्रों के मार्च निकालने की सूचना पर कुलगुरु आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
इधर, जामिया प्रशासन की ओर से भूख हड़ताल पर बैठे दोनों छात्रों की नोटिस मिलने के बाद सोमवार रात अबूजर नामक एक और छात्र भूख हड़ताल में जुड़ गया है।
15 से अधिक समर्थक हिरासत में लिए गए
बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के बाद चुनाव कराए जाने का आदेश जारी करने के बावजूद छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार किया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने चुनावों के लिए एक निश्चित तारीख और संविधान को मंजूरी देने के लिए भी एक स्पष्ट समय-सीमा की मांग की है। छात्रों ने शाम को प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए।
आंदोलन के बीच कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने और कैंपस की सुविधाओं को बंद करने का विरोध किया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई)-जामिया ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि जामिया प्रशासन, दिल्ली पुलिस की मदद से छात्रसंघ चुनाव की पुष्टि करने वाला नोटिस देने के अलावा सब कुछ कर रहा है।
छात्रसंघ के प्रतिनिधियों ने प्रशासन और छात्रों के बीच सार्थक बातचीत की अपील की है।
पहले ही पहल कर सकता था जामिया प्रशासन
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक छात्र 12 अक्टूबर को भूख हड़ताल पर बैठे। तब उनकी केवल एक ही मांग थी कि छात्रसंघ को बहाल किया जाए। पर 17 अक्टूबर तड़के छात्रों को जबरन हटाने के क्रम में सुरक्षा गार्डों पर मारपीट के आरोप लगे। प्रशासन ने तीन छात्रों पर कार्रवाई की।
छात्रों ने घटना के लिए चीफ प्राक्टर को जिम्मेदार माना। उनके इस्तीफे के साथ ही छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द करने की मांग बाद में जोड़ी गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय ने जो आदेश 26 अक्टूबर को जारी किया, वह 12 से लेकर 16 अक्टूबर को भी कर सकता था।
तब शायद छात्र मान भी जाते। पर 17 अक्टूबर और 24 अक्टूबर की घटना के बाद छात्रों का प्रशासन पर विश्वास कम हुआ है। यही कारण है कि अब छात्र छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने के साथ ही चुनाव कराने की समय सीमा निर्धारित करने की मांग पर अड़े हैं।
