युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का था इरादा, ISIS वाइस ऑफ हिंद मॉड्यूल केस में 4 दोषियों को सजा; 3 को 6 साल की जेल
राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए अदालत ने आईएसआईएस के 'वाइस ऑफ हिंद' मॉड्यूल से जुड़े आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई है।

एनआईए का पक्ष सुनने के बाद आतंकी संगठन आईएसआईएस के वाइस ऑफ हिंद माॅड्यूल से जुड़े आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईएसआईएस मॉड्यूल के चार दोषियों को सजा सुनाई।
तीन दोषियों को छह साल, एक को पांच साल की कठोर कारावास।
ऑनलाइन नेटवर्क से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का था इरादा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए की अदालत ने आतंकी संगठन आईएसआईएस के वाइस ऑफ हिंद माॅड्यूल से जुड़े आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई है।
चारों ने आरोप तय होने के दौरान करीब पांच साल हिरासत में रहने के बाद अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
विशेष न्यायाधीश विकास ढुल ने उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह-छह वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं, अफशान परवेज जराबी को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई।
मामला 2021 में किया गया था दर्ज
एनआईए ने आठ आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र और चार पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। चार आरोपितों के दोष स्वीकार करने के बाद उनके खिलाफ सुनवाई पूरी हो गई है, जबकि मामले में बाकी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
अदालत ने उमर निसार पर 36 हजार रुपये, रमीज अहमद लोन पर 31 हजार, तनवीर अहमद भट पर 23 हजार और अफशान परवेज जराबी पर नौ हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एनआईए के अनुसार, मामला 2021 में दर्ज किया गया था।
बना रहे थे ऑनलाइन नेटवर्क
जांच में सामने आया कि आईएसआईएस से जुड़े लोगों ने भारत में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, संगठन में भर्ती करने और हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ऑनलाइन नेटवर्क तैयार किया था। इसके जरिए भारत केंद्रित आईएसआईएस प्रचार पत्रिका सावत-अल-हिंद (वाइस ऑफ हिंद) की सामग्री तैयार और प्रसारित की जाती थी।
युवाओं को उकसाने का लगा आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, उमर निसार टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आईएसआईएस की सामग्री के प्रसार व युवाओं के कट्टरपंथीकरण और भर्ती में शामिल था। रमीज लोन और तनवीर भट पर आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए प्रेरित करने का आरोप था। अफशान परवेज जराबी वाइस ऑफ हिंद के लिए लेखों के प्रकाशन और उन्हें टेलीग्राम चैनलों के जरिए प्रसारित करने में शामिल पाया गया।
एनआईए ने क्या दिए हैं सुबूत?
जांच के दौरान एनआईए ने आईएसआईएस की प्रचार सामग्री, पत्रिका की पीडीएफ, कट्टरपंथी साहित्य, पोस्टर, वेब लिंक, चैट, हथियारों की खरीद से संबंधित ऑडियो रिकाॅर्डिंग, आईएसआईएस के झंडे और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद करने का दावा किया था।
