गेमिंग एप से एन्क्रिप्टेड चैट तक, युवाओं को आतंकी जाल में फंसाने की शहजाद भट्टी मॉड्यूल से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई शहजाद भट्टी मॉड्यूल के जरिए भारतीय युवाओं को इंटरनेट मीडिया, गेमिंग ऐप्स और एन्क्रिप्टेड चैट के माध्यम से आतंकी गतिविधियों में धकेल रही है।

केंद्रीय एजेंसियाें के अलावा राज्यों की आतंकवाद निराेधक यूनिटें भट्टी माॅड्यूल पर लगातार नजर रखेगी।
HighLights
आईएसआई शहजाद भट्टी मॉड्यूल से युवाओं को कर रही कट्टरपंथी।
गेमिंग ऐप्स, एन्क्रिप्टेड चैट से युवाओं को आतंकी गतिविधियों में धकेला।
सुरक्षा एजेंसियां कड़ी निगरानी, तकनीकी उपकरणों से कर रही मुकाबला।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकी गतिविधियों में धकेलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। यह माॅड्यूल जिस तरह से नए-नए और शातिराना पैंतरे अपना रही है उससे केंद्रीय एजेंसियाें के अलावा राज्यों की आतंकवाद निराेधक यूनिटें भट्टी माॅड्यूल पर लगातार नजर रखेगी।
51 किए जा चुके हैं गिरफ्तार
स्पेशल सेल के एक अधिकारी का कहना है कि भट्टी माॅड्यूल के खिलाफ सेल में 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं जिनमें 51 को गिरफ्तार किया जा चुका है। सेल ने ही इस माॅड्यूल के आतंकियों के कब्जे से चार हैंड ग्रेनेड, बड़ी संख्या में विदेशी हथियार व पेट्रोल बम बरामद किया था। उक्त हथियारों का इस्तेमाल देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में किया जाता।
नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा
आईएसआई की हरकतों को देख सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट पर राज्यों की आतंकवाद निरोधक यूनिटें बीते अक्टूबर से ही शहजाद माॅड्यूल को पकड़ने में जुट गई थी। जिससे बड़ी संख्या में आतंकी पकड़े जा चुके हैं। सोमवार को गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी शहजाद भट्टी माॅड्यूल से देश को खतरा बताते हुए इसके नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा किया।
संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी लगवाए
सेल का कहना है कि आईएसआई, इंटरनेट मीडिया के जरिए स्थानीय युवाओं को तरह-तरह के प्रलोभन देकर आतंकियों की नई पौध तैयार कर रही है।
शुरू में आईएसआई के हैंडलर्स ने भारतीय युवाओं को पैसों का लालच दिया। उनसे देश के बेहद संवेदनशील इलाकों, सैन्य ठिकानों, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के आसपास गुप्त रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवाए।
इन कैमरों का एक्सेस सीधे सीमा पार बैठे हैंडलर्स को दिया गया ताकि वे लाइव मानिटरिंग और जासूसी कर सकें। जब सुरक्षा एजेंसियों ने इस डिजिटल चाल को डिकोड कर कई माॅड्यूल पकड़े, तो आईएसआई ने अपना नया मोहरा 'अंडरवर्ल्ड और गैंग्सटर्स' को बनाया।
पाकिस्तान में छुपा बैठा है शहजाद
पाकिस्तान में रहने वाला पाकिस्तानी गैंग्सटर शहजाद भट्टी, अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहिम, उसका राइट हैंड मुन्ना झिंगाड़ा और अजमल गुर्जर (ये तीनों पहले भारत में सक्रिय थे और अब पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं) के नाम पर आईएसआई, युवाओं को जाेड़ने का काम कर रही हैं।
इनके नाम पर इंटरनेट मीडिया के जरिए युवाओं को आसान पैसा, हथियार और विदेश में सेटल करने का लालच देकर आतंक के रास्ते पर धकेला जा रहा है।
बेरोजगार युवा हैं इनका टार्गेट
इस तरह के मामले पर स्पेशल सेल के एक आला अधिकारी का मानना है कि यह 'हाइब्रिड और प्राॅक्सी वाॅर' का सबसे खतरनाक रूप है।
उनका कहना है कि ट्रेडिशनल आतंकी संगठनों (जैसे लश्कर या जैश) के बजाय अब आईएसआई स्थानीय अपराधियों और बेरोजगार युवाओं को चुन रही है। इनका पिछला कोई आतंकी रिकाॅर्ड नहीं होता, जिससे इन्हें 'लोन वोल्फ' हमलों या रेकी के लिए इस्तेमाल करना आसान होता है।
ऐसे युवा जल्द सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर नहीं आ पाते हैं, इंटरनेट मीडिया के जरिये युवा अपना अपना मकसद पूरा करने के लिए युवा आसानी से आईएसआई के चंगुल में फंस जाते हैं। दरअसल मौजूदा समय में युवा वर्ग इंटरनेट पर बहुत ज्यादा समय बिताता है।
गेमिंग एप्स, एन्क्रिप्टेड चैट एप्स (टेलीग्राम, सिग्नल) और डार्क वेब के जरिए युवाओं का ब्रेनवाश करना और उन्हें रिक्रूट करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
युवा ही क्यों होते हैं शिकार?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई पौध में शामिल अधिकतर युवा किसी कड़े वैचारिक प्रभाव में नहीं, बल्कि रातों-रात अमीर बनने, कर्ज चुकाने या गैंग्सटरों के रसूख से प्रभावित होकर आतंकी दलदल में फंस रहे हैं।
'प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस टूल्स को और मजबूत करना होगा'
स्पेशल सेल के एक डीसीपी का कहना है कि इस उभरते खतरे से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा।
सुरक्षा एजेंसियों को इंटरनेट मीडिया और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस टूल्स को और मजबूत करना होगा, ताकि रिक्रूटमेंट (भर्ती) के स्तर पर ही इन्हें दबोचा जा सके।
चूंकि इन युवाओं को फंडिंग क्रिप्टोकरेंसी या हवाला नेटवर्क के जरिए की जा रही है, इसलिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट को देश के भीतर होने वाले ऐसे संदिग्ध ट्रांजक्शन्स पर कड़ी नजर रखनी होगी।
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