10 सालों में सबसे कमजोर रहा मानसून, अल नीनो से बढ़ेगी गर्मी; फरवरी तक दिल्ली में दिखेगा असर
देश में इस साल 10 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून रहा, जिससे रबी फसलों, खाद्य उत्पादन और जल उपलब्धता पर अल नीनो का खतरा बढ़ गया है।
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10 सालों में सबसे कमजोर रहा मानसून। AI जनरेटेड
HighLights
इस साल 10 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून रहा।
अल नीनो से रबी फसलों और जल पर खतरा।
फरवरी 2027 तक गर्मी बढ़ने, कम वर्षा की आशंका।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। देश में सामान्य से 13 प्रतिशत कम वर्षा के साथ विदा हुए मानसून के बाद अब अल नीनो का खतरा रबी की फसलों, खाद्य उत्पादन और जल उपलब्धता पर बढ़ गया है।
शनिवार को क्लाइमेट ट्रेंड्स की जारी नई रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच इस साल पिछले 10 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून रहा है। ऐसे में अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान अल नीनो के 1950 के बाद की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में शामिल होने की 83 प्रतिशत आशंका है।
इसका असर फरवरी 2027 तक रह सकता है। आगामी सर्दियों में सामान्य से कम वर्षा और तापमान में वृद्धि होने भी का अनुमान है।
डॉ. रमेश ने फरवरी में ही गर्मी शुरू होने की आशंका जताई। जलवायु विज्ञानी डॉ. राक्सी मैथ्यू कोल के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन अल नीनो को जन्म नहीं देता, लेकिन उसके प्रभाव बढ़ा सकता है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला ने शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और गर्मी से निपटने की तैयारियां मजबूत करने पर जोर दिया।
कई राज्यों में वर्षा की भारी कमी
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 भारत में 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त रहा, जबकि सितंबर पांचवां सबसे गर्म सितंबर था। तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सूखे की घोषणा कर दी गई है। महाराष्ट्र के 75 प्रतिशत हिस्से में सूखे की स्थिति है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 25.6 प्रतिशत कम वर्षा हुई। यहां 1367.3 मिमी के मुकाबले 1017.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 1901 के बाद सबसे कम है। असम के 35 में से 22, अरुणाचल प्रदेश के 16 में से 12, मेघालय के 11 में से 10 और बिहार के 38 में से 33 जिलों में वर्षा कम रही।
दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य 716 मिमी के मुकाबले 542 मिमी वर्षा हुई। कर्नाटक में 30, केरल में 28, आंध्र प्रदेश में 25 और तमिलनाडु में 20 प्रतिशत कमी रही। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा लगभग सामान्य रही।
धान का रकबा घटा, जलाशयों में कम पानी
मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. के जे रमेश के मुताबिक, इस साल 14 कम दबाव वाली प्रणालियां बनीं, जिनसे 77 दिन तक कम दबाव की स्थिति रही। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया कि प्रणालियों के लंबे समय तक ठहरने से अत्यधिक वर्षा एवं बादल फटने जैसी घटनाएं बढ़ीं।
कृषि विभाग के अनुसार, 5 अक्टूबर तक पिछले साल के मुकाबले धान का रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर घटा। गन्ने और कपास का रकबा भी कम हुआ, जबकि दलहन और तिलहन का बढ़ा।
सेंटर फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के डॉ. जी. वी. रामंजनेयुलु ने कम अवधि वाली दलहन, तिलहन व मोटे अनाज की खेती और मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने की सलाह दी है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 8 अक्टूबर को देश के 178 जलाशयों में जीवित जल भंडारण सामान्य का 87.08 प्रतिशत था। दक्षिणी क्षेत्र में यह सिर्फ 47.22 प्रतिशत रहा।
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