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देश में हर 5वें इंसान का BP हाई, सिर्फ 2 प्वाॅइंट कम हों तो टलेगा हार्ट अटैक; AIIMS के डॉक्टर ने बताया फॉर्मूला

Published: Thu, 28 May 2026 10:57 AM (IST)

भारत में हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) से पीड़ित है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा और ग्रामीण ...और पढ़ें

डॉ. अंबुज ने हाई ब्लड प्रेशर की वजह से हार्ट अटैक के खतरों के बारे में बताते हुए। फोटो: जागरण

डॉ. अंबुज ने हाई ब्लड प्रेशर की वजह से हार्ट अटैक के खतरों के बारे में बताते हुए। फोटो: जागरण

HighLights

  1. भारत में हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित

  2. लाखों लोग अपनी हाई बीपी की स्थिति से अनजान

  3. दो अंक बीपी कम होने से लाखों जानें बच सकती हैं

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। भारत का हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से पीड़ित है। शहरी क्षेत्र के हर तीसरे और ग्रामीण क्षेत्र के हर चौथे व्यक्ति को हाई बीपी है। देश में यह तेजी से बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है।

यही वजह है कि यह तेजी से बढ़ती गैर-संचारी (संक्रामक) बीमारियों में शामिल है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच (एनएफएचएस-पांच) के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 24 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं।

यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने उच्च रक्तचाप की जानकारी तक नहीं होती। दिल्ली जैसे महानगरों में बदलती जीवनशैली, तनाव, अधिक नमक व जंक फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधि में कमी और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं।

40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों का खतरा अधिक 

दिल्ली पर आधारित हालिया अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों में प्री-हाइपरटेंशन और उच्च रक्तचाप के मामले सामने आए हैं, विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पुरुषों में इसका खतरा अधिक पाया गया।

एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. डाॅ. अंबुज राय ने बताया कि हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली यह बीमारी अधिकांशत: बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाती रहती है और ज्यादातर पीड़ित इससे अनजान रहते हैं।

डाॅ. अंबुज राय के अनुसार भारत में 30 करोड़ से अधिक वयस्क हाई बीपी से पीड़ित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चौथा और शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा व्यक्ति हाई पीबी से प्रभावित है। हर साल करीब 16 लाख लोगों की जान इसके कारण जाती है। यह टीबी से होने वाली मौत से कई गुना अधिक है।

डाॅ. अंबुज रॉय के अनुसार यदि लोगों का ब्लड प्रेशर औसतन सिर्फ दो अंक भी कम हो जाए, तो हर साल एक लाख से 1.6 लाख तक मौतों को रोका जा सकता है।

यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140 से घटकर 138 हो जाए, तो इसे दो अंक (ब्लड प्रेशर नापने वाली इकाई एमएमएचजी) की कमी माना जाएगा। ऐसा होने पर देश में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है।

त्रिपुरा माॅडल बना उदाहरण

प्रो. डाॅ. अंबुज राय ने बताया कि 2017 में त्रिपुरा सरकार ने एम्स, भारतीय जन स्वास्थ्य प्रतिष्ठान और भारत में मधुमेह नियंत्रण परिषद (सीसीडीसी, काउंसिल फार कंट्रोल ऑफ डायबिटीज इन इंडिया) के सहयोग से एनसीडी इनिशिएटिव त्रिपुरा शुरू किया था।

इस माॅडल में नर्स मरीज का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और अन्य स्वास्थ्य जानकारी ‘एमपावर हार्ट मोबाइल एप’ में दर्ज करती है। एप उपचार, दवा आदि की सलाह देता है, जिससे डाॅक्टरों को उपचार में आसानी होती है और सीमित संसाधनों में ज्यादा लोगों तक उपचार पहुंच जाता है।

एनएफएचएस-पांच के आंकड़ों के अनुसार

  • केवल एक में से तीन लोगों को अपनी बीमारी की जानकारी मिल पाती है।
  • पांच में से केवल एक मरीज को नियमित इलाज मिलता है।
  • सिर्फ 12 में से एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रह पाता है।
  • दो अंक बीपी कम होने से बच सकती हैं लाखों जान।

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