त्योहारी सीजन में सनातन अर्थव्यवस्था को मिलेगा 7 लाख करोड़ का बंपर उछाल
इस त्योहारी सीजन में देश की सनातन अर्थव्यवस्था को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बंपर कारोबार मिलने का अनुमान है, जो पिछले साल से 15-18% अधिक है।

त्योहारी सीजन में सनातन अर्थव्यवस्था को मिलेगा 7 लाख करोड़ का बंपर उछाल ( एआई इमेज )
HighLights
त्योहारी सीजन में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार अनुमानित।
पिछले वर्ष की तुलना में 15-18% अधिक व्यापार की उम्मीद।
'वोकल फॉर लोकल' से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराएं भारत की प्रगत का मुख्य आधार बनकर उभर रही हैं।
इसे इससे भी समझा जा सकता है कि इस वर्ष नवरात्रि से लेकर दीपावली तक के त्योहारी सीजन में देशभर में सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के बंपर कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष के रिकार्ड कारोबार से लगभग 15 से 18 प्रतिशत अधिक है। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, यह अभूतपूर्व तेजी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि देश में सनातन अर्थव्यवस्था का दायरा और प्रभाव कितनी तीव्र गति से बढ़ रहा है।
अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ऊर्जा
कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल इसे कुछ इस तरह से देखते हैं ‘ भारत का सांस्कृतिक और आर्थिक तंत्र सदियों से एक-दूसरे से जुड़ा रहा है।
नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और तुलसी विवाह जैसे पर्वों की विशाल शृंखला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों छोटे-बड़े व्यापारियों, कारीगरों और सेवा प्रदाताओं के लिए रोजगार और आर्थिक समृद्धि का सबसे बड़ा माध्यम बनती है।'
वह आगे कहते हैं कि पिछले वर्ष दीपावली के दौरान 6.05 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था, जिसमें 5.40 लाख करोड़ रुपये का वस्तु व्यापार और 65 हजार करोड़ रुपये का सेवा क्षेत्र शामिल था।
इस वर्ष ग्रामीण व अर्ध-शहरी बाजारों की सक्रियता और उपभोक्ता मांग में वृद्धि को देखते हुए कारोबार के सात लाख करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है।
बाजार में प्रमुख क्षेत्रों की अनुमानित हिस्सेदारी
कैट के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में प्रमुख क्षेत्रों की अनुमानित हिस्सेदारी इस प्रकार रहने की संभावना है:
- व्यापारिक क्षेत्र –अनुमानित हिस्सेदारी (%)
- किराना एवं एफएमसीजी 12%
- सोना, चांदी एवं आभूषण 10%
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स 8%
- कंज्यूमर ड्यूरेबल, रेडीमेड गारमेंट्स, गिफ्ट आइटम्स – 7% (प्रत्येक)
- होम डेकोर, फर्नीचर, मिठाई एवं नमकीन – 5% (प्रत्येक)
- टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स – 4%
- पूजा सामग्री, फल व ड्राई फ्रूट्स, बेकरी – 3% (प्रत्येक)
- फुटवियर – 2%
- अन्य वस्तुएं व संबंधित व्यापार – 19%
सेवा क्षेत्र और स्थानीय आयोजनों से बंपर मांग
त्योहारी अर्थव्यवस्था को गति देने में सेवा क्षेत्र और स्थानीय आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लाजिस्टिक्स, ई-कामर्स, पैकेजिंग, होटल, कैटरिंग, टेंट-लाइटिंग, कैब सेवा और इवेंट मैनेजमेंट में इस बार 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जिससे सेवा क्षेत्र का कारोबार ही 80 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
इसके साथ ही गरबा, रामलीला, दुर्गा पूजा पंडाल, दीपावली मेले और सामुदायिक व कार्पोरेट आयोजनों से स्थानीय फूलों के विक्रेताओं, सजावट करने वालों, मूर्तिकारों, फोटोग्राफरों और सुरक्षा कर्मियों की आय में भारी उछाल आएगा।
भारत बना मजबूती की नींव
खंडेलवाल ने जोर देकर कहा कि सनातन पर्वों से संचालित यह आर्थिक वृद्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फार लोकल, मेड इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जन-आंदोलन में बदलने की गवाही देती है।
आज भारतीय ग्राहक चीनी या विदेशी सामानों के बजाय स्थानीय कारीगरों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों और देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वह कहते हैं कि नवरात्रि से दीपावली तक का यह सीजन न केवल व्यापार का नया रिकार्ड बनाएगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के निर्माण के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
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