AI क्रांति में अमेरिका और चीन से बहुत समय तक पीछे नहीं रहेगा भारत, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देनेवाला सेक्टर होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत युवाओं, डाटा और बुद्धिमत्ता के दम पर एआई की दौड़ में अमेरिका और चीन ...और पढ़ें
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भारत सिर्फ एआई का उपभोक्ता ही नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बड़ी समस्या का समाधान भी करेगा।
HighLights
भारत युवाओं, डाटा और बुद्धिमत्ता से एआई में आगे बढ़ेगा।
एआई से नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि स्वरूप बदलेगा।
शिक्षा प्रणाली में बदलाव, आजीवन सीखने पर जोर देना आवश्यक।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की दौड़ में देरी से उतरा हो, लेकिन देश के पास युवाओं की बड़ी संख्या, डाटा और बुद्धिमत्ता जैसी ताकतें हैं, जिनके दम पर वह आने वाले वर्षों में अमेरिका और चीन के बराबर ही नहीं, उनसे आगे भी निकल सकता है। भारत सिर्फ एआई का उपभोक्ता ही नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बड़े एआई समाधान प्रदाता के रूप में भी उभर सकता है।
एआइ, कौशल विकास और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर दैनिक जागरण की ओर से आयोजित एक विशेष चर्चा में देश की जानी मानी रोबोटिक्स कंपनी एडवर्ब के सह-संस्थापक एवं चीफ सेल्स ऑफिसर बीर सिंह, नैसकाम में सेक्टर स्किल्स काउंसिल की उपनिदेशक प्रियंका बिष्ट और दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) के कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सिंह परिहार शामिल हुए। चर्चा का संचालन दैनिक जागरण से नीलू रंजन ने किया।
देश में शोध पर जोर देते हुए उत्पाद बनाने पर काम करने की आवश्यकता
चर्चा की शुरुआत एआइ में भारत की स्थिति से हुई। बीर सिंह ने कहा कि भारत अभी एआई व एडवांस रोबोटिक्स में चीन से पीछे जरूर है, लेकिन देश ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है और यही सबसे बड़ी बात है। भारत की आईटी इंडस्ट्री लंबे समय तक सर्विस सेक्टर पर केंद्रित रही, जबकि आवश्यकता अब देश में शोध पर जोर देते हुए उत्पाद बनाने पर काम करने की है।
एआई के लिए डाटा तैयार करना एक बड़ी चुनौती होती है और भारत के पास बड़े स्तर पर डाटा एकत्र करने की क्षमता मौजूद है। एआई से नौकरियां जाने की आशंका पर बीर सिंह ने कहा कि आने वाले समय में नौकरियों का स्वरूप बदलेगा, लेकिन रोजगार खत्म नहीं होंगे। हर औद्योगिक क्रांति के समय नौकरियां खत्म होने की आशंका जताई गई, लेकिन वास्तविकता में काम का स्वरूप बदला। भविष्य ह्यूमन-रोबोट कोलैबोरेशन का होगा, जहां खतरनाक और कठिन काम मशीनें करेंगी, जबकि इंसान रचनात्मक और बुद्धिमत्ता वाले कार्य करेंगे।
एआई के क्षेत्र में भारत सिर्फ इसका उपभोक्ता नहीं रहेगा
प्रियंका बिष्ट ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने वर्षों पहले से रिसर्च और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया, इसलिए वे आगे दिखाई देते हैं। हालांकि, भारत आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। भारत में हाल के वर्षों में रिसर्च और डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में एआई के क्षेत्र में भी भारत सिर्फ इसका उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में दुनिया में बड़े एआइ समाधान प्रदाता के रूप में उभर सकता है।
बिष्ट ने कहा कि कंपनियां अब तेजी से रिस्किलिंग और अपस्किलिंग पर काम कर रही हैं, लेकिन नई तकनीक सीखने को लेकर पुराने कर्मचारियों में झिझक भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि नैसकाम और इलेक्ट्रानिक्स एवं आइटी मंत्रालय ने मिलकर फ्यूचर स्किल्स प्राइम नाम से राष्ट्रीय डिजिटल स्किलिंग प्लेटफार्म शुरू किया है, जहां एआइ, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स समेत 11 उभरती तकनीकों से जुड़े कोर्स मुफ्त या फीस में 50 प्रतिशत तक छूट के साथ उपलब्ध हैं।
उद्योगों को समस्या के समाधान करनेवाले छात्रों की जरूरत
डॉ. अनिल सिंह परिहार ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रह सकती। अब आजीवन सीखने की जरूरत है। मौजूदा शिक्षा प्रणाली अब भी परीक्षा केंद्रित है, जबकि उद्योगों को ऐसे छात्र चाहिए, जिनमें समस्या के समाधान की क्षमता हो। इसके लिए विश्वविद्यालय अब इंडस्ट्री के साथ मिलकर पाठ्यक्रम और लैब्स को अपडेट कर रहे हैं। स्कूल स्तर से ही एआइ पढ़ाने के सवाल पर डॉ. परिहार ने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों में शुरुआती स्तर से नई तकनीक के प्रति समझ और सोच विकसित करना है। एआई कोई जादू नहीं, बल्कि डाटा और एल्गोरिदम पर आधारित तकनीक है, जिसमें भारत की प्रतिभा पहले से मजबूत रही है।
