प्राइवेट बसों में आग की घटनाओं पर सड़क मंत्रालय चिंतित, स्टैंडर्ड मानकों की होगी समीक्षा
निजी यात्री बसों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की ...और पढ़ें

बस में लगी आग। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
निजी बसों में आग की घटनाओं पर मंत्रालय ने चिंता जताई।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेगा।
गलत बॉडी निर्माण, बिजली फिटिंग आग के मुख्य कारण।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। सड़कों पर चलती निजी यात्री बसों में आग लगने तथा बसों के स्वाहा होने के साथ उसमें मासूम यात्रियों की जान जाने की बढ़ती घटनाओं को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है।
ग्रेटर नोएडा (यमुना एक्सप्रेसवे) में हाल ही में एक निजी स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की दर्दनाक मौत समेत अन्य घटनाओं के मद्देनजर नॉन एसी व एसी बसों के लिए तय मानकों का मंत्रालय के राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड ने पुर्नसमीक्षा का निर्णय लिया है।
बसों की सुरक्षा संबंधित बोर्ड की समिति ऐसी घटनाओं का अध्ययन करेगी तथा सुधार की जरूरत होने की स्थिति में मंत्रालय को मानक संबंधित कानून में बदलाव के लिए सिफारिश करेगी।
सड़क सुरक्षा से संबंधित एक सेमिनार से इतर बोर्ड के अध्यक्ष नितिन गोकर्ण ने दैनिक जागरण के सवाल पर कहा कि निजी बसों में आग की घटनाएं काफी चिंताजनक हैं और ऐसी घटनाएं उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से आ रही है। ऐसी घटनाएं बढ़ रही है।
प्रारंभिक तौर पर ऐसी घटनाओं में बाडी निर्माण व इलेक्ट्रिकल फिटिंग में खामी, ज्वलनशील पदार्थों की ढुलाई समेत अन्य कारण जिम्मेदार पाए गए हैं। जिसके लिए मानकों के पालन में राज्य विभागों की कड़ाई की आवश्यकता होती है।
फिर भी बोर्ड द्वारा जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि मंत्रालय के तय मानकों में कहां सुधार की आवश्यकता है। समिति तकनीकी व संरचनात्मक कारणों का पता लगाकर मंत्रालय को सुधार के लिए सुझाव दे सकती है।
सरकार के कड़े कदम
वैसे, हादसों पर लगाम लगाने के लिए मंत्रालय ने नई स्लीपर बसों का निर्माण केवल मान्यता प्राप्त कंपनियों या प्रमाणित केंद्रों से कराना अनिवार्य कर दिया है। बस बाडी कोड (एआइएस-052) को कड़ा करते हुए आपातकालीन निकास के मानक तय किए गए हैं।
यात्री कंपार्टमेंट में फायर प्रोटेक्शन सिस्टम (एआइएस-135) अनिवार्य किया गया है ताकि आग लगने पर तापमान नियंत्रित रहे और यात्रियों को निकलने का समय मिल सके। पुरानी बसों के फिटनेस आडिट और नियमों के उल्लंघन पर परमिट रद करने के निर्देश दिए गए हैं।
45 हादसों में 64 गंवा चुके हैं जान
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच देश में बस में आग लगने की 45 बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 64 लोगों की मौत हुई और 145 से अधिक लोग घायल हुए।
जुलाई 2023 में महाराष्ट्र के बुलढाणा में डीजल टैंक फटने से 25 यात्रियों की जलकर मौत हो गई थी, वहीं, अक्टूबर 2025 में आंध्र प्रदेश के कुरनूल और राजस्थान के जैसलमेर में हुए हादसों में 40 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे। हालिया नोएडा हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मंत्रालय से जवाब मांगा है।
हादसों की मुख्य वजहें
जांच में सामने आया है कि बस आपरेटर अनधिकृत बाडी बिल्डरों से अतिरिक्त चार्जिंग पाइंट, हैवी लाइट्स और एसी लगवाते हैं, जिससे शार्ट सर्किट होता है। अधिक बर्थ बनाने के चक्कर में आपातकालीन द्वार बंद कर दिए जाते हैं। साथ ही बसों में इस्तेमाल होने वाले ज्वलनशील गद्दे व पर्दे और अग्निशामक यंत्रों की कमी आग को जानलेवा बना देती है।
