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बाढ़, प्रदूषण और ट्रैफिक पर पहले से होगी नजर, IIT दिल्ली के स्टार्टअप ने बनाया शहर का 4D डिजिटल ट्विन

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:54 AM (IST)

आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने 'जियोट्विन' नामक 4डी डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह शहरी बाढ़, भूमि ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. जियोट्विन 4डी डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म अर्थसेंस लैब्स ने बनाया।

  2. शहरी बाढ़, भूमि धंसाव, प्रदूषण की करेगा निगरानी।

  3. विभिन्न डेटा स्रोतों को एकीकृत कर जोखिमों का पूर्वानुमान।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। शहर में भारी बारिश के बाद जलभराव होने का इंतजार किए बिना यह पता लगाया जा सकेगा कि किन इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। इसी तरह जमीन के धीरे-धीरे धंसने, यातायात के दबाव और प्रदूषण में बदलाव की भी निगरानी एक ही प्लेटफार्म से की जा सकेगी।

आइआइटी दिल्ली के एफआइटीटी में इनक्यूबेटेड जियोस्पेशियल एआइ स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने भारतीय शहरों के लिए जियोट्विन नाम से 4-डी डिजिटल ट्विन प्लेटफार्म तैयार किया है।

यह तकनीक किसी शहर की डिजिटल प्रतिकृति तैयार कर उसमें लगातार होने वाले बदलावों को रिकार्ड करेगी और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभावित जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने में मदद करेगी। प्लेटफार्म में शहरी बाढ़ का पूर्वानुमान, भूमि धंसाव की निगरानी, भूस्खलन मानचित्रण, यातायात और प्रदूषण निगरानी जैसी सुविधाएं एक साथ जोड़ी गई हैं।

इसके लिए ड्रोन और हवाई लिडार सर्वे, उपग्रह तस्वीरों, इनसार सैटेलाइट माप, मौसम व वर्षा के पूर्वानुमान, यातायात फीड और जमीन पर लगे आइओटी सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों को एक ही माडल में जोड़ा जाएगा। यानी शहर के अलग-अलग विभागों और प्रणालियों से आने वाले डाटा को एक साथ देखकर शहरी प्रशासन को निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

बारिश से पहले बाढ़ के जोखिम का आकलन 

जियोट्विन में मौसम और वर्षा से जुड़े पूर्वानुमान के साथ शहर की भौगोलिक और जमीनी जानकारी को जोड़ने की व्यवस्था है। इससे शहरी बाढ़ के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिल सकती है।

वहीं इनसार आधारित माप के जरिये भूमि के धंसाव पर नजर रखी जा सकेगी। स्टार्टअप के अनुसार, इसका उद्देश्य अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग-अलग तकनीक इस्तेमाल करने के बजाय शहर से जुड़े प्रमुख जोखिमों को एकीकृत प्रणाली में समझना है।

नगर निकाय अपने पास रख सकेंगे डाटा 

प्लेटफार्म की एक अहम विशेषता इसका सावरेन स्वरूप है। नगर निकाय और अन्य संस्थान अपने डाटा का स्वामित्व अपने पास रख सकेंगे। जरूरत पड़ने पर जियोट्विन को संस्थान के अपने परिसर में ही संचालित किया जा सकेगा।

इसके परिणामों को मौजूदा शहरी योजना और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में ओपन एपीआइ के माध्यम से जोड़ा जा सकता है।

अर्थसेंस के सह-संस्थापक एवं सीईओ डा. निर्देष कुमार शर्मा के मुताबिक, शहर हर दिन बदलता है और ऐसे में जियोस्पेशियल एआइ व वैज्ञानिक माडलिंग को शहरी प्रशासन के रोजमर्रा के फैसलों से जोड़ना जरूरी है।

वहीं सह-संस्थापक एवं आइआइटी दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. मानवेंद्र सहारिया ने कहा कि शहरी संस्थानों को बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और जोखिमों की एकीकृत तस्वीर चाहिए, जबकि डाटा संस्थानों के नियंत्रण में रहना भी जरूरी है।

नगर निगमों से चल रही बातचीत

अर्थसेंस अब नगर निगमों, शहरी विकास प्राधिकरणों और यूटिलिटी संस्थानों के साथ जियोट्विन की तैनाती को लेकर बातचीत कर रहा है। प्लेटफार्म को हाल ही में एफआइटीटी फॉरवर्ड 2026 में भी प्रदर्शित किया गया था।

स्टार्टअप को पिछले वर्ष जलवायु श्रेणी में इंडिया एआइ मिशन इनोवेशन अवार्ड मिला था और इसे भारत के शीर्ष 100 एआइ इंपैक्ट स्टार्टअप में भी शामिल किया गया था।

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