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28 सालों से डॉ. झटका बनकर घूम रहा था राजिंदर बैरागी, पुलिसवाले की हत्या में था फरार; कैसे हुई गिरफ्तारी?

Published: Fri, 07 Aug 2026 11:18 AM (IST)

राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका, जो 28 साल से हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में फरार था, दिल्ली पुलिस ...और पढ़ें

28 साल बाद राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका गिरफ्तार हुआ। जागरण

28 साल बाद राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका गिरफ्तार हुआ। जागरण

HighLights

  1. 28 साल से फरार राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका गिरफ्तार।

  2. हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या का मुख्य आरोपी था।

  3. मध्य प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टर बनकर रह रहा था।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 28 सालों से दिल्ली और हरियाणा पुलिस के लिए सिरदर्द बना राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका आखिरकार दबोचा गया। वह हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में 28 साल से फरार चल रहा था। उसे भगोड़ा घोषित भी किया गया था।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपराधी राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका को मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगौली से गिरफ्तार किया गया। 28 साल पहले फरार होकर डॉ. झटका मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के मुंगावली में भाग गया था।

कैसे चढ़ा पुलिस के हत्थे?

दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक बड़े अभियान के दौरान अपराधी राजिंदर बैरागी को मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगौली से ढूंढ लिया गया। इस दौरान क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार किया गया। यह अभियान जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए चलाया गया है।

कैसे बना डॉक्टर झटका?

मध्य प्रदेश जाने के बाद उसने अपना नाम बदलकर राजिंदर सिंह यादव रख लिया था। इसके बाद 2003 में उसने शादी कर ली। उसकी पत्नी वहां के एक सरकारी अस्पताल में काम करती है। इस दौरान उसने वहां खुद को एक झोलाछाप डॉक्टर के रूप में स्थापित किया, जिसके बाद स्थानीय लोग उसे डॉ. झटका कहने लगे थे।

आरोपी पर दिल्ली व हरियाणा में हत्या के प्रयास के कई मामले और यूपी पुलिस की हिरासत से हथकड़ी समेत भागने के मामले में वांछित था। इसके ऊपर दिल्ली, हरियाणा और यूपी में 10 मामले दर्ज हैं। डीसीपी क्राइम ब्रांच चंदर कुमार सिंह के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने जनकपुरी थाने के 1997 के दो पुराने मामलों की जांच शुरू की तो राजिंदर के बारे में पता चला, जो लंबे समय से फरार था।

कोर्ट ने किया था भगोड़ा घोषित

2008 में रोहिणी कोर्ट ने दो मामलों में उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने राजिंदर की तलाश शुरू की तो पता चला कि आरोपी ने मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेज बनाकर अपनी एक नई पहचान बना ली है।

सब-इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह व हवलदार संजीव कुमार की टीम ने सर्विलांस की मदद से उसकी लोकेशन पता की। लोकेशन ट्रेस होते ही एसीपी सुरेश कुमार व इंस्पेक्टर संजय कौशिक की टीम ने मध्यप्रदेश के अशोक नगर जिले के मुंगावली से उसे पांच अगस्त को दबोच लिया।

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राजिंदर को मुंगावली कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर द्वारका कोर्ट में पेश किया गया। पूछताछ के लिए इसे फिर से रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में पता चला कि राजिंदर पहले कबड्डी खिलाड़ी था। इसी दौरान वह अपराधियों के संपर्क में आया। 10 मई 1998 को सोनीपत में एक शादी समारोह के दौरान दुल्हन के परिवार से राजिंदर का झगड़ा हुआ था।

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