गुरुग्राम में 4.87 करोड़ के स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में 80 लाख की गड़बड़ी, पूर्व चीफ इंजीनियर समेत 11 पर FIR
सोहना नगर परिषद के 4.87 करोड़ रुपये के स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में 80 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता ...और पढ़ें

भ्रष्टाचार के आरोप में 11 लोगों पर एफआईआर। फोटो:सांकेतिक
HighLights
सोहना स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में 80 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता
पूर्व चीफ इंजीनियर समेत 11 पर एसीबी ने केस दर्ज किया
बाजार भाव से अधिक दर पर सामग्री खरीदने का आरोप
सतीश राघव, सोहना। नगर परिषद सोहना में करीब एक दशक पहले हुए स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर सामने आया है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2014-15 के दौरान करीब 4.87 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में प्राथमिक जांच के बाद तत्कालीन चीफ इंजीनियर, एसडीओ, नगर परिषद के दो तत्कालीन सचिवों और तीन ठेकेदारों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर सरकारी खजाने को 80 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय क्षति पहुंचाई गई।
25% अधिक कीमत पर खरीदी सामग्री
एसीबी की प्राथमिक जांच में प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाली स्ट्रीट लाइट सामग्री की खरीद पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि बाजार में उपलब्ध दरों की तुलना में करीब 20 से 25 प्रतिशत अधिक कीमत पर सामग्री खरीदी गई।
इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। अब एसीबी यह जांच करेगी कि सामग्री की दरें किस आधार पर तय की गईं और खरीद प्रक्रिया में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
इसके लिए टेंडर दस्तावेज, कोटेशन, वर्क आर्डर, बिल और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। मामले में कुछ ठेकेदारों को उनकी निर्धारित लाइसेंस क्षमता से अधिक राशि का काम आवंटित करने का भी आरोप है।
सरकारी निर्माण एवं विकास कार्यों में ठेकेदारों की श्रेणी और लाइसेंस क्षमता के अनुसार ही कार्य आवंटित किए जाने का प्रावधान है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए ठेकेदारों को काम आवंटित किया।
जांच में अब यह पता लगाया जाएगा कि कार्य आवंटन की प्रक्रिया में किस अधिकारी की क्या भूमिका थी और नियमों से अलग जाकर ठेकेदारों को किस तरह लाभ पहुंचाया गया।
तत्कालीन अधिकारी भी जांच के घेरे में
एफआईआर में तत्कालीन चीफ इंजीनियर और एसडीओ के अलावा नगर परिषद के दो तत्कालीन सचिवों को भी आरोपित बनाया गया है। संबंधित निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
एसीबी यह जांच करेगी कि प्रोजेक्ट की प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी किस स्तर पर दी गई थी। टेंडर प्रक्रिया कैसे पूरी हुई, सामग्री की दरें किस आधार पर तय की गईं और भुगतान से पहले अधिकारियों ने किन दस्तावेजों की जांच की, इसका भी रिकॉर्ड खंगाला जाएगा।
एसीबी ने मामले में तीन ठेकेदारों को भी आरोपित बनाया है। जांच एजेंसी अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों की भी पड़ताल करेगी।
खासतौर पर यह देखा जाएगा कि नियमों के विपरीत कार्य आवंटित करने या अधिक दर पर सामग्री खरीदने से किसी ठेकेदार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला या नहीं।
80 लाख से अधिक के नुकसान का आरोप
प्राथमिक जांच में सरकारी खजाने को 80 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय क्षति होने का आरोप सामने आया है। यह नुकसान कथित तौर पर बाजार मूल्य से अधिक दर पर सामग्री खरीदने और नियमों के विपरीत कार्य आवंटित करने से जुड़ा है।
हालांकि, वित्तीय नुकसान की अंतिम राशि विस्तृत जांच और तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। एफआइआर दर्ज होने के बाद एसीबी ने मामले की विस्तृत जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है।
इस दौरान तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदारों से पूछताछ के साथ ही प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। वर्ष 2014-15 में प्रोजेक्ट से जुड़े निर्णय किस स्तर पर लिए गए और प्रशासनिक व तकनीकी मंजूरियां किन अधिकारियों ने दी थीं, इसका भी पता लगाया जाएगा।
दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो आरोपितों की संख्या और जांच का दायरा बढ़ सकता है।
एक दशक बाद फिर खुली पुराने प्रोजेक्ट की फाइल
करीब दस वर्ष पुराने स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में एसीबी की कार्रवाई के बाद नगर परिषद के पुराने विकास कार्यों और खरीद प्रक्रिया पर फिर सवाल उठने लगे हैं।
अब विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकारी धन के कथित नुकसान में किसकी कितनी भूमिका थी और प्रोजेक्ट में हुई अनियमितताओं की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है।
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