अब नहीं डूबेगा गुरुग्राम, इंजेक्शन वेल से जमीन के अंदर चला जाएगा पानी; IIT गांधीनगर की रिपोर्ट पर एक्शन
गुरुग्राम में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए आईआईटी गांधीनगर की रिपोर्ट में सुझाए गए उपाय अब धरातल पर उतारे जाएंगे।

गुरुग्राम में बारिश का पानी अब जमीन के नीचे जाएगा। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
IIT गांधीनगर के सुझावों से गुरुग्राम में जलभराव का स्थायी समाधान
इंजेक्शन वेल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग से भूजल स्तर में सुधार होगा
अरावली क्षेत्र में प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में पानी रोकने की योजना
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए IIT गांधीनगर की रिपोर्ट में सुझाए गए उपाय अब धरातल पर उतारने की तैयारी है।
शहर से बरसाती पानी को बाहर निकालने के बजाय उसे अधिक से अधिक स्थानीय स्तर पर रोकने, भूमिगत जलभृतों तक पहुंचाने और संग्रहित करने पर जोर दिया जाएगा।
इसके लिए इंजेक्शन वेल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, भूमिगत वाटर टैंक, नए तालाब और झील विकसित करने के साथ अरावली क्षेत्र में प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में पानी रोकने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
इंजेक्शन वेल से जमीन में पहुंचेगा पानी
हरियाणा शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जलभराव के स्थायी समाधान पर मंथन किया।
बैठक में जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा, उपायुक्त उत्तम सिंह, एचएसवीपी प्रशासक वैशाली सिंह सहित जीएमडीए, सिंचाई विभाग, गुरुग्राम एवं मानेसर नगर निगम, हरसैक, ट्रैफिक पुलिस और नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
IIT गांधीनगर के विशेषज्ञों ने 50 लीटर प्रति सेकंड क्षमता वाले इंजेक्शन वेल का डिजाइन तैयार किया है। इसके माध्यम से वर्षा के दौरान एकत्र पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल रिचार्ज किया जाएगा।
अधिकारियों से इंजेक्शन वेल की संख्या, स्थान और योजना की रिपोर्ट तैयार करने की समयसीमा भी तय करने को कहा गया है। IIT गांधीनगर की रिपोर्ट में सुझाई गई तकनीक की व्यवहारिकता जांचने के लिए पालम विहार क्षेत्र में टेस्टिंग भी की गई है।
ग्रीन बेल्ट के नीचे बनेंगे भूमिगत टैंक
ग्रीन बेल्ट और खाली क्षेत्रों का उपयोग वर्षा जल संग्रहण के लिए करने की भी योजना है। इन क्षेत्रों के नीचे भूमिगत वाटर टैंक बनाकर बारिश के दौरान आने वाले पानी को कुछ समय के लिए संग्रहित किया जाएगा।
इसके बाद पानी को रिचार्ज स्ट्रक्चर अथवा अन्य वैज्ञानिक माध्यमों से जमीन में पहुंचाया जा सकेगा। इससे जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी का दबाव कम करने के साथ भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।
एक स्ट्रक्चर से 13 लाख लीटर पानी रिचार्ज
जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा ने बताया कि IIT दिल्ली के विशेषज्ञों के सहयोग से पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इनमें से सेक्टर-31 की ग्रीन बेल्ट में एक स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। इसमें लगे फ्लो मीटर से पता चला कि एक वर्षा के दौरान करीब 13 लाख लीटर पानी जमीन में रिचार्ज हुआ।
15 गांवों में विकसित होंगे बड़े जलाशय
बैठक में मानेसर निगम क्षेत्र के कम से कम 15 गांवों में बड़े जलाशय विकसित करने के लिए स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। मानेसर निगम क्षेत्र के 30 गांवों में 85 जोहड़ और तालाब हैं। इनमें पानी के बहाव, जलग्रहण क्षेत्र और तालाब के आकार के आधार पर बड़े जलाशयों की क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं देखी जाएंगी।
अरावली में रोकेंगे पानी
अरावली क्षेत्र में पहाड़ों और प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में ही बरसाती पानी रोकने की संभावनाएं भी तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
अगले महीने में रिपोर्ट देगी जापानी कंपनी
जापानी कंपनी निपोनकोई द्वारा गुरुग्राम में जलभराव को लेकर किए जा रहे सर्वे और अध्ययन की प्रगति की भी जानकारी ली गई। कंपनी को अगले माह अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
