27 जिलों में एक्शन, नतीजों पर नजर; दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर CAQM का नया फोकस
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के सदस्य सचिव तरुण पिथोड़े ने बताया कि अब ग्रेप (GRAP) केवल आपातकालीन व्यवस्था नहीं, बल्कि स्थायी प्रदूषण नियंत्रण का हिस्सा है।

तरुण पिथोड़े, सदस्य. सीएक्यूएम।
HighLights
ग्रेप का उद्देश्य अब दीर्घकालिक प्रदूषण नियंत्रण है।
प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और जवाबदेही तय की जा रही।
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण समाधान।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सर्दियों की दस्तक के साथ दिल्ली और एनसीआर के वायु प्रदूषण में भी इजाफा होने लगता है। हालांकि केंद्र एवं राज्य सरकारें भी तमाम एजेंसियों के साथ सतर्क हो जाती हैं, लेकिन तब भी गैस चैंबर बनने वाली स्थिति कमोबेश हर साल उत्पन्न होती हैं।
आखिर क्यों नहीं इस स्थिति में सुधार हो पा रहा? ढेर सारे उपायों के बावजूद दिल्ली की हवा अब भी दमघोंटू क्यों होती है? इस दिशा में रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों में कहां कमी है एवं इस साल क्या कुछ तैयारियां हैं?
इन्हीं सब सवालों को लेकर दैनिक जागरण के संजीव गुप्ता ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य सचिव तरुण पिथोड़े से लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश...

सवाल : दिल्ली एवं एनसीआर में ग्रेप प्रदूषण बढ़ने पर लागू की जाने वाली आपातकालीन व्यवस्था रही है। आयोग के गठन के बाद इसके क्रियान्वयन में बुनियादी बदलाव क्या आया है?
जवाब : पहले ग्रेप को मुख्य रूप से अस्थायी या आकस्मिक व्यवस्था के तौर पर ही देखा जाता था। आयोग बनने के बाद हमने इसे अधिक संस्थागत रूप दिया है। अब सिर्फ प्रदूषण बढ़ने पर प्रतिबंध लगाने के बजाय प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, पहले से तैयारी, जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई के परिणाम का आकलन करने पर जोर है। हमारा प्रयास है कि ग्रेप केवल संकट के समय की प्रतिक्रिया न रहे, बल्कि दीर्घकालिक प्रदूषण नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था का हिस्सा बने।
सवाल : आपने जवाबदेही तय करने की बात कही है। व्यवहार में यह जवाबदेही किस तरह सुनिश्चित की जा रही है?
जवाब : अलग-अलग क्षेत्रों और गतिविधियों के लिए संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है। किस काम की जिम्मेदारी किस विभाग की है, उसे कब तक पूरा करना है, इसे स्पष्ट किया गया है। निगरानी और अनुपालन की व्यवस्था भी मजबूत की गई है।
सवाल : आयोग के पास धारा-14 के तहत कार्रवाई का अधिकार भी है। क्या इससे विभागों और अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ी है?
जवाब : धारा-14 आयोग को नियमों और निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कानूनी शक्ति देती है। इसका उद्देश्य किसी को दंडित करना मात्र नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आयोग के निर्देशों का गंभीरता से पालन हो। जहां उल्लंघन सामने आता है, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है। वाकई इससे जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत हुई है।
सवाल : दिल्ली की हवा को सुधारने के लिए हर साल ग्रेप लगाना पड़ता है। क्या यह इसका संकेत नहीं है कि स्थायी समाधान अभी भी दूर है?
जवाब : वायु प्रदूषण किसी एक मौसम या एक शहर की समस्या नहीं है। इसके कई स्रोत हैं और इनके समाधान के लिए लगातार काम करना पड़ता है। इसलिए हमारा ध्यान केवल आपातकालीन नियंत्रण पर नहीं है। दीर्घकालिक और क्षेत्रवार लक्ष्य तय किए गए हैं। नीतियों का मूल्यांकन इस आधार पर किया जा रहा है कि उनसे वास्तव में प्रदूषण में कितना अंतर आया।
सवाल : एनसीआर में दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के जिले भी शामिल हैं। 27 जिलों के बीच समन्वय कितना बड़ा चुनौतीपूर्ण काम है?
जवाब : यह निश्चित रूप से जटिल व्यवस्था है, क्योंकि अलग-अलग राज्यों और जिलों की परिस्थितियां अलग हैं। लेकिन वायु प्रदूषण की समस्या प्रशासनिक सीमाओं में बंधी नहीं है। इसलिए एनसीआर के 27 जिलों के लिए एकीकृत कार्ययोजना और नीतिगत ढांचा तैयार किया गया है। हमारा प्रयास है कि हर क्षेत्र में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत के अनुरूप कार्रवाई हो और राज्यों के बीच समन्वय बना रहे।
सवाल : क्या सिर्फ एकीकृत योजना बना देना पर्याप्त है?
जवाब : योजना के साथ उसका क्रियान्वयन और निगरानी ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए हमने क्षेत्रवार लक्ष्य निर्धारित किए हैं, उनकी प्रगति की समीक्षा की जा रही है। हमारा दृष्टिकोण केवल यह देखने तक सीमित नहीं है कि कोई आदेश जारी हुआ या नहीं, बल्कि यह देखना है कि उसके परिणाम क्या आए।
सवाल : वाहन उत्सर्जन कम करने के लिए बीएस-6 सीएनजी और ई वाहनों को बढ़ावा देने से समस्या हल हो सकती है?
जवाब : वाहन तकनीक में सुधार जरूरी है, लेकिन यह अकेला समाधान नहीं है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना और अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि लोग निजी वाहनों पर कम निर्भर हों।
सवाल : क्या अब केवल निरीक्षण और सीलिंग के बजाय प्रदूषण में वास्तविक कमी को सफलता का पैमाना बनाया जा रहा है?
जवाब : बिल्कुल। हमारा जोर परिणाम आधारित व्यवस्था पर है। किसी इकाई का निरीक्षण करना या नोटिस जारी करना अपने आप में अंतिम परिणाम नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि प्रदूषणकारी गतिविधि नियंत्रित हुई या नहीं और उससे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ा।
