दिल्ली में रोजाना 200 मीट्रिक टन गोबर से बनेगी बायोगैस, गंदगी और बदबू से मिलेगी राहत
नजफगढ़ की गोयला डेरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया गया, जो प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण करेगा।

पशुपालकों को मिलेगा आर्थिक लाभ (AI-Generated image)
HighLights
गोयला डेरी में 16 करोड़ का बायोगैस संयंत्र शुरू।
प्रतिदिन 200 टन गोबर का वैज्ञानिक प्रसंस्करण होगा।
स्वच्छता, ईंधन उत्पादन और यमुना प्रदूषण नियंत्रण में सहायक।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। प्रदेश की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को नजफगढ़ स्थित गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। संयंत्र में प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा।
इससे डेरी क्षेत्रों में स्वच्छता बेहतर होगी, गोबर को नालियों में बहाकर यमुना तक पहुंचने से रोकने में मदद मिलेगी और स्वच्छ ईंधन का उत्पादन बढ़ेगा। कार्यक्रम में मंत्री आशीष सूद, महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत और विधायक संदीप सहरावत, निगम पार्षद सविता पवन शर्मा सहित अनेक व्यक्ति मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए प्रदूषण के स्रोतों पर रोक लगाना जरूरी है। केवल नदी की सफाई पर्याप्त नहीं है; उन गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा, जिनसे प्रदूषक नदी तक पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि गोबर को अपशिष्ट मानकर नालियों में बहाने के बजाय उससे ऊर्जा और खाद तैयार करना वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष में तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए हैं, जबकि छह अन्य संयंत्रों पर काम चल रहा है।
डेरी कालोनियों में नालियों और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रविधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नंगली सकरावती संयंत्र में एक वर्ष के दौरान 55 हजार टन गोबर का इस्तेमाल हुआ और इसके लिए किसानों को 3.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार होने का अनुमान
दिल्ली नगर निगम द्वारा स्थापित इस संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस और करीब 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) तैयार होने का अनुमान है। उत्पादित सीबीजी की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिये इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को की जाएगी। प्रसंस्करण के बाद बचने वाली स्लरी का इस्तेमाल प्राकृतिक खाद के रूप में किया जा सकेगा।
पशुपालकों को मिलेगा आर्थिक लाभ
परियोजना के तहत एजेंसी डेरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर एकत्र करेगी। इससे पशुपालकों को गोबर के निस्तारण में राहत मिलने के साथ आर्थिक लाभ भी होगा। मुख्यमंत्री ने डेयरी संचालकों से निर्धारित संग्रहण व्यवस्था अपनाने की अपील की।
