नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। केंद्र सरकार ने एक याचिका पर अपना जवाब देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि देश मेंं 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात किया जाताा है। अगर इसे निर्यात करने की इजाजत दे दी गई तो यह भारत के लिए आर्थिक रूप से तर्कसंगत नहींं होगा।

यह याचिका यूके की वेदांता कंपनी की भारतीय इकाई केरन इंडिया द्वारा लगाई गई थी, जिसमेंं कहा गया कि राजस्थान के बाड़मेर स्थित कंपनी के प्लांट से निकलने वाले अतिरिक्त कच्चे तेल को भारत से बाहर निर्यात करने की इजाजत दी जाए।

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इस याचिका पर भारत सरकार के अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सचिवोंं की सशक्त कमेटी इस मुद्दे पर विचार कर चुकी है। वह इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि अगर ऐसा करने की इजाजत दे दी गई तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा इससे बुरी तरह प्रभावित होगी। ऐसे मेंं महंगा और हल्का कच्चा तेल खरीदने पर मजबूर होना पड़ेगा।

भारत की रिफाइनरी मेंं 223 मिलियन टन की क्षमता है। मौजूदा स्थिति मेंं केवल 38 मिलियन टन घरेलू स्तर पर निकाला गया कच्चा तेल ही इन रिफाइनरी मेंं जाता है। बाकि 84.9 प्रतिशन कच्चा तेल विदेशोंं से मंगाया जाता है। सरकार की स्टैडिंग काउंसिल की तरफ से कहा गया कि केरन भारत मेंं किसी भी रिफाइनरी को अपने हिसाब से दाम तय करके कच्चा तेल बेचने के लिए स्वतंत्र है।

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कंपनी की तरफ से दावा किया गया था कि कच्चा तेल निर्यात नहींं करने से सरकार को 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस पर जवाब दिया गया कि भारत सरकार अपने प्राकृतिक संसाधनोंं से मुनाफा कमाने की इच्छुक नहींं है। कहा गया कि जब तक हम अपनी जरूरत के मुताबिक कच्चा तेल निकाल पाने मेंं सक्षम नहींं हो जातेे, तेल निर्यात नहींं किया जा सकता।

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