फर्जी पासपोर्ट पर भारत से भागा गैंगस्टर हरसिमरन बैंकॉक से डिपोर्ट, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने गैंगस्टर हरसिमरन को गिरफ्तार किया, जो फर्जी पासपोर्ट पर विदेश भाग गया था। उस पर जबरन वसूली, हत्या के प्रयास जैसे 23 मामले दर्ज हैं। वह गोल्डी ढिल्लों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क बना रहा था। भारतीय एजेंसियों और थाई अधिकारियों के सहयोग से उसे बैंकॉक से निर्वासित किया गया। वह पहले भी यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश में विफल रहा था।

पीटीआई नई दिल्ली। फर्जी पासपोर्ट पर देश से फरार होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना आपराधिक नेटवर्क फैलाने की कोशिश कर रहे गैंगस्टर हरसिमरन उर्फ बादल उर्फ सिमरन (38) को बैंकॉक से डिपोर्ट किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक पूर्व शालीमार बाग निवासी हरसिमरन को 26 नवंबर को भारतीय एजेंसियों और थाई अधिकारियों के समन्वित प्रयासों के बाद बैंकॉक से दिल्ली भेजा गया। जांच में पता चला कि उसने गोरखपुर के राजेश सिंह नाम से फर्जी पहचान पर पासपोर्ट बनवाया और इस साल जनवरी में यूरोप-स्थित गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों की मदद से बैंकॉक भाग गया।
इसके बाद वह दुबई गया और मानव तस्करों व ढिल्लों के साथियों की मदद से अमेरिका और यूरोप पहुंचने की कोशिश करता रहा। पुलिस के अनुसार, अजरबैजान के रास्ते और फिर बेलारूस–लातविया–पोलैंड रूट से यूरोप में प्रवेश की उसकी कोशिश नाकाम रही। इन देशों ने उसे हिरासत में लेने के बाद डिपोर्ट कर दिया।
वह वीजा बढ़ाने के लिए दोबारा बैंकॉक लौटा, जहां भारतीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर उसे पकड़ लिया गया। विदेश मंत्रालय ने उसके फर्जी पहचान वाले पासपोर्ट को रद्द कर दिया, जिससे उसका भारत में प्रत्यर्पण संभव हो सका।
दिल्ली पहुंचने पर हसरिमरन को हवाईअड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ उगाही, हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े 23 मामले दर्ज हैं। वह शालीमार बाग थाने का घोषित ‘बैड कैरेक्टर’ है और दो मामलों में दोषसिद्ध भी हो चुका है।
भारत से फरार होने के बाद हरसिमरन ने एक मामले के महत्वपूर्ण गवाह को धमकाया और उसे बयान बदलने के लिए दबाव डालते हुए 50 लाख रुपये की मांग की। इस पर इस साल की शुरुआत में मुकर्जी नगर थाने में उसके खिलाफ नई FIR दर्ज की गई।
जमानत मिलने के बाद उसने कम से कम 14 मामलों की अदालत सुनवाई में पेश होना बंद कर दिया। पुलिस के अनुसार, हसरिमरन ने करियर की शुरुआत दिल्ली और महाराष्ट्र में पहलवान के रूप में की थी, लेकिन बुराड़ी, सागरपुर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली में सक्रिय गैंगस्टरों के संपर्क में आने के बाद वह अपराध की दुनिया में उतर गया। बाद में वह ढिल्लों गिरोह का हिस्सा बन गया और अमेरिका व यूरोप में ऑपरेशन चलाने की योजना बनाने लगा।
साल 2010 के एक हत्या मामले में आरोपी महेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को हरसिमरन के बारे में अहम सुराग मिले। पूछताछ में महेंद्र ने बताया कि उसके पास से बरामद हथियार हरसिमरन ने ही उपलब्ध कराए थे। इसके बाद उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और केंद्रीय एजेंसियों की मदद से उसकी तलाश शुरू की गई।

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